नयी दिल्ली/तिरुवनंतपुरम, आठ जुलाई (भाषा) केरल के वनमंत्री शिबू बेबी जॉन ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार ने जंगली सूअर को हानिकारक जीव (वर्मिन) घोषित करने के राज्य के अनुरोध को खारिज कर दिया है।
जॉन ने यह बात नयी दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद कही।
जॉन ने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्होंने वन क्षेत्रों की सीमा से लगे इलाकों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर केरल की चिंताओं को रेखांकित करते हुए एक ज्ञापन सौंपा और प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की।
जॉन ने कहा, ‘‘हमने उन्हें ऐसे क्षेत्रों को दर्शाने वाले नक्शे दिखाए, जहां जंगली सूअर का खतरा जंगलों की सीमा से बाहर तक फैल गया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि हम अब भी जंगली सूअरों को मार रहे हैं।’’
मंत्री के अनुसार, यादव ने उनसे कहा कि जंगली सूअर को ‘वर्मिन’ घोषित नहीं किया जा सकता।
जॉन ने कहा, ‘‘उन्होंने कहा कि जंगली सूअर को वर्मिन घोषित नहीं किया जा सकता। यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-2 के तहत ही रहेगा।’’
जॉन ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने बैठक के दौरान मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत मारे गए जंगली सूअरों की तस्वीरों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जंगली सूअर को हानिकारक जीव घोषित नहीं किया जा सकता।’’
उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने (यादव) कहा कि जंगली सूअर को हानिकारक जीव घोषित नहीं किया जा सकता। यह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की अनुसूची-2 के तहत ही रहेगा।’’
जॉन ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने बैठक के दौरान मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत मारे गए जंगली सूअरों की तस्वीरों का भी उल्लेख किया।
जॉन ने कहा, ‘‘उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जंगली सूअर को हानिकारक जीव घोषित नहीं किया जा सकता।’’
फेसबुक पर एक पोस्ट में जॉन ने कहा कि उन्होंने यादव से केरल में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उनसे केरल के वन क्षेत्रों की सीमा से लगे इलाकों में गंभीर मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया।’’
जॉन ने कहा कि केंद्र को सौंपे गए ज्ञापन में राज्य की चिंताओं को रेखांकित किया गया है और इस मुद्दे के समाधान के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।
केरल लंबे समय से जंगली सूअर को हानिकारक जीव घोषित करने की मांग करता रहा है। राज्य ने जंगली सूअरों के हमलों से फसलों को होने वाले व्यापक नुकसान और मानव मौतों का हवाला देते हुए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम में संशोधन की भी मांग की है।
राज्य में मौजूदा व्यवस्था के तहत, फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जंगली सूअरों को तभी मारा जा सकता है, जब किसान स्थानीय निकाय के माध्यम से आवेदन करता है और उसे वन विभाग की मंजूरी मिलती है।
भाषा अमित माधव
माधव