नयी दिल्ली, तीन मई (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को एक दिशानिर्देश दस्तावेज जारी किया, जिसमें बचपन के मधुमेह की जांच, उपचार और दीर्घकालिक प्रबंधन के लिए एक रूपरेखा प्रदान की गई है।
मंत्रालय के अनुसार, यह दस्तावेज पहली बार एक संरचित और मानकीकृत राष्ट्रीय ढांचा स्थापित करता है, जिससे भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाता है जिन्होंने बचपन के मधुमेह की देखभाल को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में एकीकृत किया है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में सर्वोत्तम प्रथाओं पर हाल ही में मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में ‘‘बच्चों में मधुमेह पर मार्गदर्शन दस्तावेज’’ जारी किया गया।
मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, इस रूपरेखा का उद्देश्य सामुदायिक और विद्यालय-आधारित मंचों के माध्यम से जन्म से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों की सार्वभौमिक जांच सुनिश्चित करना है ताकि मधुमेह की शीघ्र पहचान की जा सके।
बयान में कहा गया है कि संदिग्ध मामलों का तत्काल रक्त शर्करा परीक्षण किया जाएगा और पुष्टिकरण जांच और उपचार के लिए उन्हें जिला स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा जाएगा।
इस पहल की एक प्रमुख विशेषता सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर एक व्यापक निःशुल्क देखभाल पैकेज का प्रावधान है, जिसमें जांच सेवाएं, आजीवन इंसुलिन थेरेपी, ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स और नियमित अनुवर्ती देखभाल शामिल हैं।
इस पहल का उद्देश्य परिवारों पर वित्तीय बोझ को कम करना और मधुमेह से पीड़ित बच्चों के लिए निर्बाध उपचार सुनिश्चित करना है।
दस्तावेज में सामुदायिक स्तर पर स्क्रीनिंग को ज़िला अस्पताल आधारित प्रबंधन और मेडिकल कॉलेजों में उन्नत देखभाल से जोड़ने वाली एक एकीकृत देखभाल प्रणाली भी निर्धारित की गई है, ताकि निर्बाध आगे का उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
भाषा अमित रंजन
रंजन