नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) शिक्षा मंत्रालय ने कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के निदेशक बीवी रमन्ना रेड्डी की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां वापस ले ली हैं। साथ ही संस्थान के कामकाज और नेतृत्व की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
एनआईटी कुरुक्षेत्र के निदेशक रेड्डी से जब इस संबंध में जानकारी मांगी तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘एनआईटी कुरुक्षेत्र के कामकाज, प्रगति और मामलों की समीक्षा करने और निदेशक के नेतृत्व की भूमिका का आकलन करने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। यह समिति शैक्षणिक और प्रशासनिक सहित संस्थान के समग्र कामकाज की जांच करेगी। यह भर्ती और पदोन्नति प्रक्रियाओं, कर्मचारियों की शिकायतों के निपटान और केंद्रीय सतर्कता आयोग तथा अन्य एजेंसियों द्वारा भेजी गई शिकायतों से संबंधित मुद्दों की भी समीक्षा करेगी।’’
अधिकारी ने बताया, ‘‘जांच लंबित रहने तक निदेशक की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां वापस ले ली गई हैं। समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।’’
इस समिति की अध्यक्षता राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच (एनईटीएफ)के अध्यक्ष अनिल सहस्रबुद्धे करेंगे। इसके दो अन्य सदस्यों में नागपुर स्थित विश्वेश्वरय्या राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (वीएनआईटी) के शासी मंडल के अध्यक्ष एम मदन गोपाल और भोपाल स्थित मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएएनआईटी) के निदेशक के.के. शुक्ला शामिल हैं।
अधिकारी ने कहा, ‘‘समिति संस्थागत प्रदर्शन का भी आकलन करेगी, जिसमें एनआईआरएफ रैंकिंग में गिरावट, प्रमुख वैधानिक और प्रशासनिक पदों (विशेष रूप से रजिस्ट्रार) में लंबे समय तक रिक्तियां और प्रशासनिक तथा वित्तीय शक्तियों का प्रयोग शामिल है, साथ ही निदेशक के नेतृत्व और कामकाज की भी जांच करेगी।’’
मंत्रालय ने एनआईटी रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि समिति को सभी आवश्यक अभिलेखों की सुरक्षा और उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा सभी संबंधित संकाय सदस्य, कर्मचारी और अन्य हितधारक पूर्ण सहयोग करे।
अधिकारियों ने हालांकि, इस काईवाई के कारणों की जानकारी नहीं दी।
भाषा धीरज माधव
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