नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) दिल्ली-एनसीआर के एक अस्पताल के चिकित्सकों को 10 साल की बच्ची में ‘क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस’ (अग्न्याशय की लंबे समय तक रहने वाली बीमारी) का एक दुर्लभ मामला मिला है। यह बीमारी आमतौर पर वयस्कों में होती है, खासकर उन लोगों में जो लंबे समय तक शराब और तंबाकू का सेवन करते हैं।
इस मामले ने चिकित्सकों और विशेषज्ञों में चिंता बढ़ा दी है।
फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा मंगलवार को जारी एक बयान के अनुसार, लगभग दो साल से बच्ची को बार-बार पेट दर्द, उल्टी और वजन घटने की समस्या हो रही थी, जिसके चलते अग्न्याशय को पहले ही काफी नुकसान पहुंच चुका था और इसके कारण उसे कम उम्र में ही मधुमेह हो गया था।
बयान में कहा गया कि यह बीमारी बच्चों में बहुत कम पाई जाती है और शुरुआती चरण में इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, क्योंकि इसके लक्षण सामान्य पाचन संबंधी समस्याओं जैसे ही होते हैं। हालांकि, बेहतर जांच तकनीकों और बढ़ती जागरूकता के कारण अब इस बीमारी की पहचान पहले से ज्यादा हो रही है।
अस्पताल की गुरुग्राम शाखा में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी ऑन्कोलॉजी, मिनिमल एक्सेस और बैरिएट्रिक सर्जरी के प्रधान निदेशक और विभागाध्यक्ष डॉ. अमित जावेद ने बताया कि अब बच्चों में भी ऐसी बीमारियां सामने आ रही हैं, जिन्हें पहले ज्यादातर बड़ों तक ही सीमित माना जाता था। इसके संभावित कारणों में आनुवंशिक कारक, बीमारियों के बदलते पैटर्न और बेहतर जांच शामिल हैं।
उन्होंने कहा, ‘जब वह हमारे पास आई, तब तक इस बीमारी ने अग्न्याशय को काफी हद तक प्रभावित कर दिया था। अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह पोषण, विकास और रक्त शर्करा नियंत्रण को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकती है।’
बयान में कहा गया कि जहां बड़ों में यह बीमारी अक्सर शराब के सेवन से जुड़ी होती है, वहीं बच्चों में आमतौर पर यह आनुवंशिक बदलाव, जन्म से जुड़ी समस्याएं, शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली से जुड़ी बीमारियां या चयापचय संबंधी गड़बड़ियों के कारण होती है।
चिकित्सकों ने बताया कि इलाज के बाद बच्ची की हालत में काफी सुधार हुआ और कुछ ही हफ्तों में उसे दर्द से राहत मिली, उसकी भूख में सुधार हुआ और वह स्कूल सहित सामान्य गतिविधियों में भाग लेने लगी।
भाषा नोमान नोमान दिलीप
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