Income Tax New Rule: टैक्सपेयर्स को देना होगा पाई-पाई का हिसाब! इस फॉर्म के जरिए दाखिल होगा ITR, यहां पढ़ें सभी जरूरी जानकारियां

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टैक्सपेयर्स को देना होगा पाई-पाई का हिसाब! इस फॉर्म के जरिए दाखिल होगा ITR, Income Tax New Rule in India

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  • Publish Date - March 31, 2026 / 11:10 PM IST,
    Updated On - March 31, 2026 / 11:35 PM IST

Income Tax New Ruleइनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) के सभी फॉर्म नोटिफाई कर दिए हैं। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 की आय के लिए रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आयकर विभाग ने सभी जरूरी फॉर्म जारी कर दिए हैं, जिससे अब वित्त वर्ष 2025-26 की आय का रिटर्न भरा जा सकेगा। मंगलवार को विभाग ने ITR-2, ITR-3, ITR-5, ITR-6 और ITR-7 के साथ अपडेटेड रिटर्न के लिए ITR-U फॉर्म भी अधिसूचित किया। इससे पहले ITR-1 (सहज) और ITR-4 (सुगम) 30 मार्च को जारी किए जा चुके थे। बिना ऑडिट वाले करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई तय की गई है।

किसे कौन सा फॉर्म भरना होगा?

Income Tax New Rule:  छोटे और मध्यम करदाताओं के लिए सहज और सुगम फॉर्म सबसे ज्यादा उपयोग में आते हैं। 50 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले वेतनभोगी व्यक्ति ITR-1 भर सकते हैं, जबकि व्यवसाय या पेशे से आय वाले व्यक्ति, एचयूएफ और फर्म (एलएलपी को छोड़कर) ITR-4 का उपयोग करेंगे। पूंजीगत लाभ वाले लेकिन व्यवसाय से आय नहीं रखने वाले करदाता ITR-2 भरेंगे, जबकि व्यवसायिक आय वालों के लिए ITR-3 तय किया गया है। फर्म, एलएलपी और सहकारी संस्थाएं ITR-5, कंपनियां ITR-6 और ट्रस्ट व संस्थाएं ITR-7 के तहत रिटर्न दाखिल करेंगी।

इस बार नियम सख्त, ज्यादा खुलासे जरूरी

हालांकि फॉर्म के ढांचे में बड़ा बदलाव नहीं है, लेकिन इस बार जानकारी देने के नियम सख्त किए गए हैं। अब कई मामलों में, भले ही आय टैक्स सीमा से कम हो, रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य हो सकता है। जैसे यदि किसी व्यक्ति के पैन पर 25 हजार रुपये से ज्यादा टीडीएस कटा है, चालू खाते में एक करोड़ रुपये से अधिक जमा हैं, विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हुआ है या बिजली बिल 1 लाख रुपये से अधिक है, तो उसे रिटर्न भरना होगा।

रिटर्न फाइल न करने वालों और NRI पर खास ध्यान

जानकारी देने का यह नया ढांचा कंप्लायंस में रह गई कमियों को दूर करने के मकसद से बनाया गया लगता है. जैसा कि जालान रिपोर्ट में बताया कि कई लोग ITR फाइल करना भूल जाते थे, और जब इनकम टैक्स विभाग को किसी और से उस व्यक्ति के बारे में जानकारी मिलती थी, तो उन लोगों को दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ता था. उन्होंने आगे कहा कि NRI भी उन लोगों में शामिल रहे हैं, जो रिटर्न फाइल करना भूल जाते थे – खासकर उन मामलों में, जहां जानकारी देने की ये शर्तें लागू होती थीं. इस समस्या को दूर करने के लिए, बदले हुए फॉर्म – खासकर ITR-2, ITR-3 और ITR-4 – अब ऐसे मामलों में खास घोषणाएं मांगते हैं, जो टैक्स देने वालों के लिए एक चेकलिस्ट का काम करते हैं.

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