Chandrashekhar Azad on women reservation Bill || Sansad TV File
नई दिल्ली: महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर संसद में चर्चा के दौरान शुक्रवार को विपक्ष ने जहाँ केंद्र सरकार पर निशाना साधा तो सत्तादल के सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार का आभार व्यक्त किया। (Chandrashekhar Azad on women reservation Bill) इसी कड़ी में नगीना के सांसद चन्द्रशेखर आजाद ने भी इस बिल पर अपनी बात सदन में रखी।
सांसद चंद्रशेखर ने कहा, “वह आज इस सदन में अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और संवेदनशील विषय पर अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए है। यह केवल एक विधेयक नहीं है। यह भारत की लोकतंत्र की आत्मा का प्रश्न है। यह उस न्याय की परीक्षा है जिसकी नींव हमारे संविधान में रखी थी और यह उस विश्वास का सवाल है जो देश की करोड़ों महिलाओं के संसद से जुड़ा हुआ है। वह शुरुआत से स्पष्ट कर देना चाहते है कि वह महिला आरक्षण के पक्ष में है और हम इसे महिलाओं का संवैधानिक अधिकार मानते हैं। लोकतंत्र में समर्थन और सवाल दोनों साथ चलते हैं। उनकी सरकार से मांग है कि आबादी आधी आबादी 50% है। 33% की उनको बढ़ा के 51% कर देना चाहिए। जब बराबरी महिलाओं को तो सदियों से नहीं मिला जो वह बढ़कर मिलना चाहिए। सरकार की और हाउस की ये मंशा होनी चाहिए।”
नगीना सांसद ने आगे कहा, आरक्षण से पहले सुरक्षा के बारे में तो बताना चाहिए कि एनसीआरबी का डाटा क्या कह रहा है। तमाम सरकारों में महिलाओं पे हिंसा हो रही है। इसका जवाब भी सरकारों को देना चाहिए कि जब महिला सुरक्षित नहीं होंगी तो उनके अधिकार की रक्षा कैसे होगी? जब हम महिला सशक्त की सशक्तिकरण की बात करते हैं तो यह कोई नई सोच नहीं है। (Chandrashekhar Azad on women reservation Bill) यह उस परंपरा की निरंतरता है। जहां सावित्रीबाई फुले, मां रमाबाई, अहिल्याबाई होलकर, फातिमा शेख, झलकारी बाई, मां उदा देवी पासिया, अवंतिका बाई लोधी, मां फूलन देवी जैसी वीरांगनाओं के संघर्ष हमारे सामने उदाहरण है। बाबा साहब अंबेडकर जी ने संविधान बनाते हुए कहा था कि हम एक ऐसे संविधान को बना रहे हैं जहां हर नागरिक को समान अधिकार देगा। चाहे वह पुरुष हो या महिला। हमें याद रखना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि, वह किसी भी समाज की प्रगति को महिलाओं की प्रगति से मापते है। बाबा साहब अंबेडकर जी ने सबसे बड़ा का जो सबसे बड़ा क्रांतिकारी कदम था वो हिंदू कोड बिल था। उन्होंने उसमें महिलाओं को संपत्ति में अधिकार विवाह और तलाक में बराबरी गोद लेने का पूरा अधिकार था। और इसके जब वह सफल नहीं हो पाए तो उन्होंने कानून मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बताया कि, संविधान संविधान संशोधन जिसके तहत स्थानीय निकाह में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया गया। आज लाखों महिलाएं पंचायत और नगर पालिकाओं में नेतृत्व कर रही है। वह अलग बात है कि बहुत बड़ी संख्या में महिला प्रतिनिधि अपने निर्णय स्वतंत्र रूप से नहीं ले पाती क्योंकि हमारे समाज ने भी पुरुषों और महिलाओं की बराबरी में स्वीकार नहीं किया। कहीं पिता कहीं पुत्र कहीं पति उनके निर्णय लेते हैं। ऐसा बहुत बड़े पैमाने पर देखा गया। भाषण चाहे कुछ भी दिया जाए लेकिन सत्यता यही है। सांसद ने कहा कि, मान्यवर कांशीराम साहब कहा करते जिसकी इतनी संख्या भारी उसकी इतनी हिस्सेदारी इन्हीं विचारों की कसौटी पर अगर वर्तमान महिला आरक्षण कानून को परखा जाए तो स्पष्ट हो जाता है कि 33% आरक्षण आधी आबादी के साथ पूर्ण न्याय नहीं करता और यदि 33% आरक्षण दे भी दिया तो सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि एससी, एसटीबी और ओबीसी और मुस्लिम वर्ग की महिलाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व कैसे मिलेगा?
‘मेडिकल टूरिज्म’ को बढ़ावा देने के लिए अपनी ‘बेड’ क्षमता विस्तार को तेज कर रहा है मैक्स
उप्र: राष्ट्र विरोधी गतिविधि में शामिल होने के आरोप में दो लोग गिरफ्तार, विदेशी संपर्क की जांच शुरू
चीन में कैथोलिक समुदाय पर बढ़ा दबाव, सरकारी गिरजाघर से जुड़ने को मजबूर : रिपोर्ट
ओलंपिक में कोविड-19 टीका लगाने का फर्जी प्रमाणपत्र देने वाला हॉकी कोच बर्खास्त
इजराइल और अमेरिका का लक्ष्य ‘एक जैसा’, हम किसी भी स्थिति के लिए तैयार: नेतन्याहू
आंध्र प्रदेश में सड़क दुर्घटना में आठ श्रद्धालुओं की मौत, मुख्यमंत्री नायडू ने शोक जताया