Charan Hembram Padma Shri 2026: हजारों बच्चों को दी संताली भाषा की शिक्षा, अब मिला देश का बड़ा सम्मान, जानिए कौन है चरण हेम्ब्रम

Charan Hembram Padma Shri 2026: संताली (ओल चिकी) शिक्षाविद् एवं सांस्कृतिक कार्यकर्ता चरण हेम्ब्रम को पद्म श्री से सम्मानित किया गया है।

Charan Hembram Padma Shri 2026: हजारों बच्चों को दी संताली भाषा की शिक्षा, अब मिला देश का बड़ा सम्मान, जानिए कौन है चरण हेम्ब्रम

Charan Hembram Padma Shri 2026 /Image: IBC24 File

Modified Date: June 17, 2026 / 02:53 pm IST
Published Date: June 17, 2026 2:50 pm IST
HIGHLIGHTS
  • सम्मानित संताली (ओल चिकी) शिक्षाविद् एवं सांस्कृतिक कार्यकर्ता Charan Hembram को पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया है
  • उन्होंने संताली भाषा, ओल चिकी लिपि, साहित्य और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है
  • चरण हेम्ब्रम ने अनेक ‘ओल इतुन आसरा’ संस्थाओं की स्थापना कर हजारों बच्चों को संताली भाषा की शिक्षा से जोड़ा

नई दिल्ली। Charan Hembram Padma Shri 2026: सम्मानित संताली (ओल चिकी) शिक्षाविद् एवं सांस्कृतिक कार्यकर्ता चरण हेम्ब्रम को पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। संताली भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के संवर्धन तथा संस्थागत विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया। अनेक ओल इतुन आसरा संस्थाओं की स्थापना की। जानिए उनके संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानी।

ओडिशा में जन्मे, संथाली भाषा पोल की लिपि और संस्कृति के संरक्षक चरण हिम्रम (पद्मश्री 2026) चरण हेम्रम एक ऐसे कर्म योगी जिन्होंने अपना पूरा जीवन संथाली भाषा ओलचे की लिपि और आदिवासी संस्कृति को पहचान और भविष्य देने के लिए समर्पित कर दिया। बचपन में ही भाग्य ने पिता का साया छीन लिया। पर मां की छाया ने उनके बचपन को कभी मुरझाने नहीं दिया। इस पौधे को वृक्ष बनने के लिए एक माली की जरूरत थी। एक गुरु की आवश्यकता थी जो उन्हें मिली अपने मामा के गांव में। ओल्ड चिक लिपि की यह शिक्षा पूरे संथाली समाज की आवाज बनने वाली थी।

ट्रेन के एक सफर में खो गए सारे सर्टिफिकेट

Charan Hembram Padma Shri 2026 वक्त बीता दसवीं की पढ़ाई पूरी की। आईटीआई का कोर्स किया। एक साधारण सी नौकरी की तलाश थी। लेकिन जीवन ने एक असाधारण मोड़ ले लिया। ट्रेन के एक सफर में सारे सर्टिफिकेट खो गए। हताश निराश एक बार फिर पहुंचे गुरु के पास। ये हादसा नहीं भाग्य का संकेत है बेटा। संथाली रास्ता नहीं मंजिल है। गुरु के इस वाक्य को व्याकरण और संथाली के विस्तार को जीवन का लक्ष्य बनाकर चल पड़े एक ऐसे सफर पर जिसका हर कदम संथाली भाषा और संस्कृति को समर्पित था। टीचर ट्रेनिंग ली और शुरू हुआ संथाली पढ़ाने का सफर गांव में, स्कूलों में, आसरा में और कभी पेड़ों के नीचे मुश्किलें थी पर वे रुके नहीं। एक के बाद एक सैकड़ों आसरा केंद्र बने।

हजारों बच्चों को दी शिक्षा

Charan Hembram Padma Shri 2026 हजारों बच्चों को मिली संथाली की शिक्षा और संथाली को मिला एक नया जीवन। अपने इन्हीं प्रयत्नों के बल पर वे संथाली सचिव के रूप में नियुक्त हुए। जहां उन्होंने संस्थानों को जोड़ा और आसराओं को मान्यता भी दिलाई। शब्द किताबों में उतरे। संथाली पाठ्यक्रम भी बनी और रोजगार के लिए योग्यता भी। इनकी अथक कोशिशों ने संथाली को अपनी सरगम दी। इनके बनाए गीत और नाटक पूरे समुदाय के लिए जीवन संिता का रूप बन गए। जब हम अपनी भाषा को जीवित रखते हैं तो भाषा हमारे अस्तित्व को जीवित रखती है। चरण ब्रम के गीतों में जीवित पंडित रघुनाथ मुर्मू के यह शाश्वत विचार आज भी संथाली समाज को जीवन का मार्ग दिखा रहे हैं।

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लेखक के बारे में

सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.