छत्तीसगढ़ के ‘शराब घोटाले’ में आरोपी पूर्व आबकारी आयुक्त को जमानत मिली

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छत्तीसगढ़ के ‘शराब घोटाले’ में आरोपी पूर्व आबकारी आयुक्त को जमानत मिली

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  • Publish Date - July 16, 2026 / 10:02 PM IST,
    Updated On - July 16, 2026 / 10:02 PM IST

प्रयागराज, 16 जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ में 2,161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले से जुड़े एक मामले में राज्य के पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को जमानत दे दी है।

इस मामले में गौतम बुद्ध नगर के कासना थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। दास पर छत्तीसगढ़ की आबकारी नीति और निविदा प्रक्रिया का मसौदा तैयार कर एक होलोग्राम निर्माता कंपनी को लाभ पहुंचाने का आरोप है।

प्रवर्तन निदेशालय ने 28 जुलाई 2023 को उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि दास नीति तैयार करने में शामिल थे और उन्होंने नोएडा की होलोग्राम निर्माता कंपनी ‘मेसर्स प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड’ को लाभ पहुंचाया। इसके बाद राज्य सरकार ने नोएडा में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने निरंजन दास की जमानत याचिका स्वीकार कर ली।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, याचिकाकर्ता और तत्कालीन विशेष सचिव (आबकारी) अरुणपति त्रिपाठी समेत अन्य आरोपी निविदा प्रक्रिया में शामिल थे और उन्होंने ऐसे होलोग्राम के निर्माण में मदद की जिनका कथित शराब घोटाले में इस्तेमाल किया गया।

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोप छत्तीसगढ़ में पहले से दर्ज एक अन्य प्राथमिकी का भी हिस्सा हैं और उस मामले में उच्चतम न्यायालय याचिकाकर्ता को जमानत दे चुका है।

उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता 19 दिसंबर 2025 से जेल में है और जमानत पर रिहा होने पर वह अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेंगे तथा मुकदमे की कार्यवाही में सहयोग करेंगे।

राज्य सरकार ने जमानत याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि याचिकाकर्ता का आपराधिक इतिहास है और उनके खिलाफ कई प्राथमिकियां दर्ज हैं।

अदालत ने जमानत याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि यदि कोई आरोपी जमानत पाने का पात्र है तो उसे केवल उसके आपराधिक इतिहास के आधार पर जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि आपराधिक इतिहास के आधार पर ऐसी कोई असाधारण परिस्थिति नहीं बताई गई है, जिससे जमानत देने से इनकार किया जा सके।

उसने कहा कि राज्य सरकार ने ऐसी कोई सामग्री पेश नहीं की, जिससे यह पता चले कि याचिकाकर्ता के साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने, गवाहों को धमकाने या जमानत पर मिली स्वतंत्रता का दुरुपयोग करने की आशंका है।

भाषा सं राजेंद्र सिम्मी

सिम्मी