एच1एन1 के बढ़ते मामलों के बीच बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक खतरा, चिकित्सकों ने चेताया
एच1एन1 के बढ़ते मामलों के बीच बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक खतरा, चिकित्सकों ने चेताया
नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) दिल्ली में एच1एन1 के बढ़ते मामलों के बीच चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों में गंभीर संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में इस साल अब तक इन्फ्लुएंजा-ए के 2,300 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। इनमें शुक्रवार तक एच1एन1 के 1,777 से अधिक मामले शामिल हैं। अकेले बृहस्पतिवार को एच1एन1 के 114 मामले दर्ज किए गए।
मेदांता मेडिक्लिनिक, डिफेंस कॉलोनी और मेदांता-द मेडिसिटी के श्वसन एवं नींद चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ निदेशक डॉ. भरत गोपाल ने कहा कि एच1एन1 के बढ़ते मामलों ने संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
उन्होंने बताया कि मौसमी इन्फ्लुएंजा के टीकाकरण को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। खासतौर पर अधिक जोखिम वाले लोग तथा बच्चों या बुजुर्ग सदस्यों वाले परिवार इसके बारे में जानकारी ले रहे हैं।
सर गंगाराम अस्पताल के चिकित्सक डॉ. बिभु आनंद ने कहा कि स्वाइन फ्लू की जांच लगभग सभी अस्पतालों और जांच केंद्रों में आसानी से उपलब्ध है।
उनके अनुसार, निजी अस्पतालों में इस जांच की लागत सामान्यतः 1,500 से 5,000 रुपये के बीच होती है, जबकि पूरी श्वसन जांच के लिए बायोफायर पैनल की कीमत 9,000 से 15,000 रुपये तक हो सकती है।
उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में यह जांच लगभग न के बराबर खर्च में उपलब्ध है।
एच1एन1 के बढ़ते मामलों का असर दिल्ली-एनसीआर के अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या पर भी दिखाई दे रहा है। गुरुग्राम स्थित पारस हेल्थ के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. आकाशनील भट्टाचार्य ने कहा कि पिछले एक सप्ताह में मरीजों की संख्या में करीब पांच से छह की बढ़ोतरी हुई है, जो 22 से 25 प्रतिशत की वृद्धि के बराबर है।
चिकित्सकों के अनुसार, एच1एन1 के सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना, थकान, नाक बहना और नाक बंद होना शामिल हैं। कुछ मरीजों, विशेषकर बच्चों में मतली, उल्टी या दस्त की शिकायत भी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि बिना जटिलता वाले इन्फ्लुएंजा के ज्यादातर मरीजों का उपचार अस्पताल में भर्ती किए बिना किया जा सकता है। आमतौर पर निमोनिया, सांस लेने में परेशानी, रक्त में ऑक्सीजन का स्तर कम होने, लगातार तेज बुखार रहने या पहले से मौजूद बीमारी के बिगड़ने की स्थिति में अस्पताल में भर्ती करने पर विचार किया जाता है।
चिकित्सकों ने सलाह दी कि सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी, लगातार सीने में दर्द, ऑक्सीजन का स्तर 94 प्रतिशत से कम होना, भ्रम की स्थिति, होंठ या उंगलियों का नीला पड़ना अथवा शुरुआती सुधार के बाद दोबारा बुखार आने जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
उन्होंने लोगों को हाथों और श्वसन तंत्र की स्वच्छता बनाए रखने, भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनने, संक्रमित व्यक्तियों के निकट संपर्क से बचने और अस्वस्थ होने पर घर पर रहने या खुद को अलग रखने की सलाह दी।
भाषा तान्या रंजन
रंजन

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