सीआईएसएफ ने झारखंड में 250 टन कोयला जब्त किया

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सीआईएसएफ ने झारखंड में 250 टन कोयला जब्त किया

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  • Publish Date - September 24, 2026 / 07:25 PM IST,
    Updated On - September 24, 2026 / 07:25 PM IST

रांची, 24 सितंबर (भाषा) केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने कोयला चोरी और उसकी हेराफेरी रोकने के लिए चलाए गए अभियान के दौरान बृहस्पतिवार को झारखंड के लातेहार जिले में करीब 250 टन कोयला जब्त किया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

अधिकारी के मुताबिक, सीआईएसएफ ने कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) की फुलबसिया साइडिंग के पास एक सुनसान स्थान से यह कोयला जब्त किया।

उन्होंने बताया कि 19 सितंबर को सीसीएल के मगध और आम्रपाली क्षेत्रों में सीआईएसएफ की औपचारिक तैनाती के बाद केंद्रीय बल की यह पहली बड़ी कार्रवाई है।

सीआईएसएफ की हाल में तैनात इकाई को कोयला चोरी, हेराफेरी तथा कोयले के अनधिकृत भंडारण और परिवहन के खिलाफ सुरक्षा, निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सीआईएसएफ के उप महानिरीक्षक सुमंत सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘कोयला चोरी और हेराफेरी के खिलाफ खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए अभियान में सीआईएसएफ ने फुलबसिया साइडिंग के पास एक सुनसान स्थान से करीब 250 टन ग्रेड-9 कोयला जब्त किया। सीसीएल के मगध और आम्रपाली क्षेत्रों में 19 सितंबर को औपचारिक तैनाती के बाद यह केंद्रीय बल की पहली बड़ी प्रवर्तन कार्रवाई है।’’

उन्होंने बताया कि कोयले के अवैध रूप से जमा किए जाने और संदिग्ध भंडारण की सूचना मिलने के बाद 23 सितंबर को पूर्वाह्न करीब 11 बजे अभियान चलाया गया।

अधिकारी के अनुसार, त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) के सहयोग से सीआईएसएफ की एक टीम ने चिह्नित स्थान पर छापा मारकर करीब 250 टन ग्रेड-9 कोयला बरामद किया।

अभियान का नेतृत्व उप कमांडेंट अजय पांडे ने किया। उनके साथ सहायक कमांडेंट सुभाष कुमार और हर्ष लवानिया थे। अभियान की निगरानी कमांडेंट अमीर कुमार ने की।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संदिग्ध तौर-तरीके में साइडिंग क्षेत्र से कोयले को हाथ से उठाकर खनन और परिचालन वाले सक्रिय क्षेत्रों से दूर सुनसान स्थानों पर ले जाना शामिल था।

अधिकारियों ने दावा किया कि कोयले की छोटी-छोटी खेप को प्लास्टिक की रस्सी से बनी चार टोकरियां लगी अस्थायी साइकिलों के जरिये ले जाया जाता था। प्रत्येक साइकिल पर एक चक्कर में करीब आधा टन कोयला ले जाया जाता था।

सिंह ने बताया कि इसके बाद जमा किए गए कोयले को ट्रकों समेत बड़े वाणिज्यिक वाहनों के जरिये इन सुनसान स्थानों से आगे ले जाने की योजना थी। उन्होंने कहा कि कोयले की आवाजाही को छिपाने और बाद में उसके परिवहन को सुगम बनाने के लिए बीच में भंडारण स्थलों तथा परिवहन के कई चरणों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है।

भाषा रवि कांत सुरेश

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