सीआईएसएफ ने बंगाल, झारखंड में विशेष अभियान में 428 मीट्रिक टन से ज्यादा अवैध कोयला जब्त किया

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सीआईएसएफ ने बंगाल, झारखंड में विशेष अभियान में 428 मीट्रिक टन से ज्यादा अवैध कोयला जब्त किया

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  • Publish Date - July 9, 2026 / 07:53 PM IST,
    Updated On - July 9, 2026 / 07:53 PM IST

नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों ने झारखंड और पश्चिम बंगाल की खदानों से कोयले की चोरी और अवैध निकासी रोकने के लिए पांच दिवसीय विशेष अभियान के दौरान 428 मीट्रिक टन से अधिक कोयला बरामद किया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

अर्द्धसैन्य बल के जवानों और त्वरित प्रतिक्रिया टीम (क्यूआरटी) ने दोनों पड़ोसी राज्यों में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) की कोयला खदानों के कई एकड़ क्षेत्र में अभियान चलाया।

सीआईएसएफ को देश के प्रमुख कोयला क्षेत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

केंद्र सरकार ने हाल में सीआईएसएफ को खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत तलाशी और जब्ती अभियान चलाने के लिए अधिकृत एजेंसी के रूप में नामित किया है, ताकि उसके अधिकार क्षेत्र वाली कोयला खदानों से कोयले की चोरी पर रोक लगाई जा सके।

सीआईएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘केंद्र सरकार की ‘जीरो कोल लीकेज’ पहल के तहत चार से आठ जुलाई के बीच चलाए गए इस अभियान में अवैध रूप से खनन, भंडारित या परिवहन किए जा रहे 428.34 मीट्रिक टन कोयले को बरामद किया गया। इस दौरान चार प्राथमिकी दर्ज की गई और कोयला के अवैध खनन व परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे ट्रक, 13 मोटरसाइकिल तथा अन्य उपकरणों को जब्त किया गया।’’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पांच जुलाई को देश में अवैध कोयला खनन और चोरी की स्थिति की समीक्षा की थी। इस दौरान उन्होंने सीआईएसएफ को ‘‘जीरो कोल लीकेज’’ योजना लागू करने का निर्देश दिया। इसके तहत संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई टीम का गठन करने, बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने और अवैध खनन करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया।

अधिकारी ने बताया कि इस अभियान के लिए सीआईएसएफ ने कई तरह के तरीकों और साधनों का इस्तेमाल किया। इनमें खुफिया जानकारी जुटाने वाली टीम, ड्रोन, परिवहन मार्गों की निगरानी, अचानक निरीक्षण, परिवहन दस्तावेजों का सत्यापन, कोयला डिपो और धर्मकांटे की जांच तथा जीपीएस आधारित दस्तावेजीकरण शामिल थे।

भाषा आशीष पवनेश

पवनेश