भुवनेश्वर, नौ जुलाई (भाषा) इस्कॉन ने पुरी के जगन्नाथ मंदिर की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उससे दुनियाभर में अलग-अलग तिथियों पर रथ यात्रा और भगवान जगन्नाथ से जुड़े अन्य उत्सव आयोजित करने के फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया था।
इस्कॉन ने कहा कि वह इस मुद्दे पर ‘‘पूरे सम्मान के साथ हमेशा के लिए इस चर्चा से अलग हो रहा है।’’
वहीं, अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) के एक प्रवक्ता ने कहा कि संगठन पिछले 60 वर्षों से 100 से अधिक देशों में भगवान जगन्नाथ की संस्कृति और परंपरा का प्रचार-प्रसार कर रहा है। उन्होंने कहा कि रथ यात्रा का मूल उद्देश्य यही है कि भगवान जगन्नाथ सभी लोगों को अपना आशीर्वाद प्रदान करें।
बारहवीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर की निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति (एसजेटीएमसी) के अध्यक्ष गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने कहा कि इस्कॉन ने उनके चार जुलाई के पत्र का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि वह मंदिर की अपील स्वीकार नहीं कर रहा है।
उन्होंने बताया कि पुरी के गजपति महाराजा को भेजे गए पत्र में इस्कॉन ने यह भी कहा है, ‘‘हम पूरे सम्मान के साथ इस चर्चा से हमेशा के लिए अलग हो रहे हैं।’’
भगवान जगन्नाथ के प्रथम सेवक माने जाने वाले दिव्यसिंह देव ने इस्कॉन के संचालन परिषद आयोग (जीबीसी) के अध्यक्ष मधुसेवित दास को लिखे पत्र में संगठन से आग्रह किया था कि वह 19 अक्टूबर 2025 के उस निर्णय पर पुनर्विचार कर उसमें संशोधन करे, जिसके तहत भारत के बाहर विभिन्न देशों में वर्ष भर अलग-अलग तिथियों पर रथ यात्रा आयोजित करने का फैसला किया गया है।
भाषा आशीष देवेंद्र
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