छत्तीसगढ़: भिलाई इस्पात संयंत्र के दो अधिकारी कबाड़ चोरी करने के मामले में गिरफ्तार

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छत्तीसगढ़: भिलाई इस्पात संयंत्र के दो अधिकारी कबाड़ चोरी करने के मामले में गिरफ्तार

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  • Publish Date - July 9, 2026 / 10:42 PM IST,
    Updated On - July 9, 2026 / 10:42 PM IST

दुर्ग, नौ जुलाई (भाषा) छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले स्थित भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) की इकाई भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से लोहे के कबाड़ की कथित चोरी के मामले में बृहस्पतिवार को संयंत्र के दो अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

दुर्ग जिले के पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने बताया कि गिरफ्तार अधिकारियों की पहचान बीएसपी के महाप्रबंधक हिमांशु भूषण मलिक (54) और एसोसिएट इंजीनियर मनोज कुमार देवांगन (58) के रूप में हुई है।

उन्होंने बताया कि मामला 26 मई को तब सामने आया, जब पुलिस को मिली सूचना के आधार पर भिलाई के हथखोज इलाके स्थित ‘एके ट्रेडर्स’ नाम की कंपनियों के परिसर में छापा मारा गया।

अधिकारी ने बताया कि छापे के दौरान वहां ट्रकों और भारी वाहनों में लदी लोहे की प्लेटें, बीम, कटिंग सामग्री और अन्य सामान भी बरामद किया गया।

अग्रवाल ने बताया कि परिसर में बड़ी मात्रा में लोहे के कबाड़ का भंडार भी मिला था।

उन्होंने बताया कि जांच में पता चला कि आरोपी कथित तौर पर एक संगठित रैकेट चला रहे थे, जिसमें बीएसपी से लोहे का कबाड़ चोरी किया जाता था और उसे बेचने से पहले परिसर में अवैध रूप से जमा किया जाता था।

अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने मौके से लगभग 250 टन लोहे की प्लेटें, बीम की कटिंग और लोहे की अन्य सामग्री जब्त की।

उन्होंने बताया कि चोरी किए गए कबाड़ के परिवहन और लोडिंग में इस्तेमाल किए गए वाहनों को भी जब्त किया गया।

अग्रवाल ने बताया कि जब्त संपत्ति की कुल कीमत लगभग 3.22 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें करीब 90 लाख रुपये का लोहे का कबाड़ और वाहन एवं मशीनरी शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि जांच के शुरुआती चरण में 13 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और नए साक्ष्यों के आधार पर मलिक और देवांगन की इस रैकेट में कथित संलिप्तता सामने आई, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारी ने बताया कि इन गिरफ्तारियों के साथ मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या 15 हो गई है और फरार अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

उन्होंने बताया कि आरोपी पिछले चार-पांच महीनों से लोहे का कबाड़ कथित तौर पर चोरी कर रहे थे और लाभ के लिए उसे अवैध रूप से जमा कर रहे थे।

भाषा सं संजीव जितेंद्र

जितेंद्र