रोहिणी इमारत हादसा: पीड़ित परिवारों का मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन, सदमे में हैं मृतकों के परिजन

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रोहिणी इमारत हादसा: पीड़ित परिवारों का मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन, सदमे में हैं मृतकों के परिजन

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  • Publish Date - July 9, 2026 / 10:37 PM IST,
    Updated On - July 9, 2026 / 10:37 PM IST

नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के रोहिणी में निर्माणाधीन इमारत गिरने की घटना में जान गंवाने वाले 42-वर्षीय राम के परिवार ने मुआवजे की मांग को लेकर हादसा स्थल पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है, साथ ही परिवार ने शव लेने और अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है।

परिवार की मांग है कि सरकार उनकी पत्नी और स्कूल में पढ़ रहे दो बेटों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा करे।

मैकेनिक का काम करने वाले राम उन तीन लोगों में शामिल हैं, जिनकी बुधवार शाम करीब 4:20 बजे रोहिणी सेक्टर-16 स्थित एमसीडी स्कूल के पास जी-4/152 और जी-4/153 पर निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत गिरने से मौत हो गई थी। भारी बारिश के बीच हुए इस हादसे में कई लोग मलबे में दब गए थे।

जहां बचाव दल पूरी रात मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटा रहा, वहीं राम का परिवार उनके जाने के गम में सुध-बुध सा दिखाई दिया।

राम अपने एक दोस्त के साथ वहां से गुजर रहे थे, तभी इमारत उनके ऊपर गिर गई। उनके दोस्त की जान बच गई, लेकिन राम की मौत हो गई।

राम के जुड़वां भाई श्याम ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘लोग हमें अंतिम संस्कार की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कह रहे हैं, लेकिन हमने शव लेने से इनकार कर दिया है। हमें आर्थिक मदद चाहिए, ताकि उनकी पत्नी परिवार का पालन-पोषण कर सके और कक्षा छह तथा नौ में पढ़ रहे उनके दोनों बेटों की पढ़ाई न छूटे। हम अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। अगर हमारी बात नहीं सुनी गई तो आंदोलन और तेज करेंगे। मेरा भाई चला गया, लेकिन उसका परिवार अभी जिंदा है।’’

श्याम ने भावुक होते हुए कहा, ‘‘हमारा परिवार पूरी तरह टूट चुका है। हम कोई अनुचित मांग नहीं कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि जब तक सरकार लिखित रूप में मुआवजे का आश्वासन नहीं देती, तब तक परिवार राम का शव नहीं लेगा।

श्याम ने कहा, ‘‘हम राम को सबसे बुरी हालत में देख चुके हैं। अब उनका शव दो दिन या चार दिन शवगृह में रहे, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हमारे लिए जरूरी यह है कि सरकार उनके परिवार की मदद के लिए आगे आए।’’

घटनास्थल से कुछ दूरी पर एक और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। चौबीस-वर्षीय नूरुल उर्फ कैफ महज तीन महीने पहले दिल्ली आया था। उसका सपना था कि वह कमाकर अपनी मां और भाई-बहनों का सहारा बनेगा, लेकिन अब उसके परिजनों को उसका शव मिलेगा।

नूरुल के रिश्तेदार और हादसे में बच गए सद्दाम उर्फ रवि ने बताया कि इमारत इतनी तेजी से गिरी कि मजदूरों को भागने का मौका तक नहीं मिला।

उन्होंने कहा, ‘‘सब कुछ 30 सेकंड से भी कम समय में हो गया। हमें समझ ही नहीं आया कि क्या हुआ और पूरी इमारत भरभराकर गिर गई।’’

उन्होंने बताया कि सद्दाम इमारत के बाहरी हिस्से में काम कर रहे थे। इमारत गिरने पर वह मलबे में दब गए, लेकिन बचाव दल ने उन्हें ढूंढ़ निकाला।

उनके रिश्तेदार ने बताया, ‘‘जब तक वह मलबे में फंसे रहे, उन्हें पाइप के जरिए पानी और ऑक्सीजन दी जाती रही। कई घंटे बाद उन्हें जीवित बाहर निकाल लिया गया।’’

सद्दाम का सरकारी अस्पताल में इलाज हो रहा है, लेकिन वह गहरे सदमे में हैं।

हादसे में मारे गए नूरुल के रिश्तेदार ने कहा, ‘‘वह बहुत शांत स्वभाव का था। उसने कभी किसी से ऊंची आवाज में बात नहीं की। वह हमेशा दूसरों की मदद करता था और सबसे पहले अपने परिवार के बारे में सोचता था।’’

उन्होंने बताया कि नूरुल अपनी मां और भाई-बहनों सहित पांच लोगों के परिवार का सहारा था। वह हादसे से महज दो-तीन दिन पहले ही इस निर्माण स्थल पर काम करने लगा था।

इस हादसे में मृतकों की संख्या बृहस्पतिवार को बढ़कर तीन हो गई। रोहिणी के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) शशांक जायसवाल ने बताया कि सद्दाम उर्फ रवि (32) को जीवित बचाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान राम, नूरुल उर्फ कैफ और इमारत के मालिक के पिता राम दुआ के रूप में हुई है।

पुलिस ने बताया कि इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और इमारत गिरने के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।

भाषा शोभना सुरेश

सुरेश