जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा, संवैधानिक गारंटी बहाल कराने के लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध हैं: उमर

Ads

जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा, संवैधानिक गारंटी बहाल कराने के लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध हैं: उमर

  •  
  • Publish Date - August 15, 2026 / 03:19 PM IST,
    Updated On - August 15, 2026 / 03:19 PM IST

श्रीनगर, 15 अगस्त (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा और अन्य संवैधानिक गारंटी बहाल कराने के लिए प्रतिबद्ध है जिन्हें अगस्त 2019 में समाप्त कर दिया गया था।

अब्दुल्ला ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में हो रहे प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद कबायली हमले का मुकाबला करने का उनकी पार्टी के पूर्वजों का फैसला सही था।

अब्दुल्ला ने यहां बख्शी स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में कहा, ‘‘मैं लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम आपके साथ हैं, आपका प्रतिनिधित्व करते रहेंगे और जम्मू-कश्मीर को उस मुकाम तक ले जाने के लिए काम करेंगे, जिसका सपना आजादी के लिए लड़ने और शहीद होने वाले लोगों ने देखा था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उनकी शहादत का सम्मान करने के लिए हम उन सपनों को साकार करेंगे जो वे विरासत के रूप में हमारे लिए छोड़ गए-चाहे वह विशेष दर्जा वापस हासिल करना हो, जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक गारंटी बहाल करना हो, राज्य का दर्जा फिर पाना हो या प्रगति के नए युग की शुरुआत करना हो।’’

मुख्यमंत्री ने पीओजेके में हो रहे प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति ने 1947 में पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलावरों का मुकाबला करने के नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला और उनके साथियों के फैसले को सही साबित किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं सीमा पार की स्थिति देखता हूं तो मुझे महसूस होता है कि हमारे पूर्वज सही थे, जिन्होंने कहा था—‘हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार।’’

उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता मास्टर अब्दुल अजीज हमले को रोकने की कोशिश करते हुए मुजफ्फराबाद में मारे गए थे।

अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि अगर केंद्र ने 2019 में जम्मू-कश्मीर की विशेष संवैधानिक गारंटी समाप्त नहीं की होतीं तो आज पीओजेके के लोग जम्मू-कश्मीर से फिर जुड़ने के लिए आंदोलन कर रहे होते।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर का वह हिस्सा हमारा है। हम वहां के लोगों को अपना मानते हैं। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में इस उम्मीद के साथ आज भी उनके लिए सीटें सुरक्षित रखी गई हैं कि एक दिन वे लोग उन खाली सीट का उपयोग कर सकेंगे।’’

मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र और संघवाद को भारत की दो सबसे बड़ी ताकतें बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र की हर कीमत पर रक्षा करना, उसे मजबूत करना और जीवित रखना हमारी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।’’

अब्दुल्ला ने कहा कि भारत केवल कागज पर ही नहीं, बल्कि भावना में भी राज्यों का संघ है। उन्होंने कहा, ‘‘जब हम संघवाद की बात करते हैं तो उसे मजबूत करने की शुरुआत जम्मू-कश्मीर से होती है। हमसे जो कुछ छीना गया है, वह हमें वापस मिलना चाहिए ताकि संघवाद और पहचान केवल शब्दों तक सीमित न रहें बल्कि व्यवहार में भी दिखाई दें।’’

उन्होंने कहा कि संघवाद को मजबूत करने का अर्थ केवल किसी केंद्र शासित प्रदेश को राज्य में बदलना नहीं है बल्कि राज्यों को मजबूत करना भी है।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘जब केंद्रीय एजेंसियां राज्यों के मामलों में हस्तक्षेप करने लगती हैं तो संघवाद कमजोर होता है। जब किसी राज्य की शक्तियां कम की जाती हैं, उन्हें खोखला किया जाता है और केंद्रीय एजेंसियां उनका इस्तेमाल करने लगती हैं तो संघवाद को नुकसान पहुंचता है और इसका असर अक्सर सड़कों पर दिखाई देता है।’’

उन्होंने कहा कि हाल में दिल्ली की सड़कों पर छात्रों के प्रदर्शन इसी समस्या का परिणाम थे।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमारे संघीय ढांचे में शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों राज्यों की जिम्मेदारी थे… लेकिन परीक्षा व्यवस्था बदल दी गई। नीट, एनटीए और जेईई जैसी परीक्षाएं बनाई गईं और मेडिकल एवं इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश देने का राज्यों का अधिकार छीन लिया गया। इसका परिणाम दिल्ली में इसी क्रम के खिलाफ प्रदर्शन और आंदोलन के रूप में सामने आया।’’

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संस्थानों के लिए राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं कराना ठीक है, लेकिन राज्यों को अपने संस्थानों के लिए परीक्षाएं कराने का अधिकार होना चाहिए।

अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के कारण युवाओं को भी सड़कों पर उतरना पड़ा।

अब्दुल्ला ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार, विपक्ष और मीडिया-तीनों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार का काम कार्य करना है; विपक्ष का काम विधानसभा के भीतर भी और बाहर भी सरकार को जवाबदेह बनाना है तथा मीडिया का काम दोनों को जवाबदेह बनाना है।’’

नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता ने कहा कि हालांकि, सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरकार की होती है। उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष भी अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकता और यह बात केवल शब्दों में नहीं बल्कि व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए।’’

भाषा सिम्मी अमित

अमित