लोकसेवकों के खिलाफ शिकायत हलफनामे के साथ दर्ज की जानी चाहिए: उच्चतम न्यायालय

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लोकसेवकों के खिलाफ शिकायत हलफनामे के साथ दर्ज की जानी चाहिए: उच्चतम न्यायालय

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  • Publish Date - January 27, 2026 / 08:54 PM IST,
    Updated On - January 27, 2026 / 08:54 PM IST

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि लोकसेवकों द्वारा आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में अपराध किए जाने के आरोप वाली याचिका के साथ हलफनामा होना आवश्यक है।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने प्रधान न्यायाधीश द्वारा सभी उच्च न्यायालयों को भेजे गए एक पत्र का उल्लेख किया, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया था कि न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों पर तब तक विचार नहीं किया जाना चाहिए जब तक कि उनके साथ हलफनामा न हो।

पीठ ने कहा, ‘‘जब किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ आरोपों की प्रामाणिकता को हलफनामे द्वारा समर्थित करने की आवश्यकता होती है, तो लोकसेवकों के मामले में भी इसी तरह की आवश्यकता पर जोर देने का समान औचित्य मौजूद है।’’

इसने कहा, ‘‘…इस तरह की आवश्यकता का अंतर्निहित उद्देश्य दोनों मामलों में समान है, अर्थात् झूठी, तुच्छ या परेशान करने वाली शिकायतों को दूर करना और लोकसेवकों को दंड के दायरे में लाने तथा उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग से बचाने के बीच संतुलन बनाना।’’

उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट को बीएनएसएस की धारा 175 की उपधारा (3) के तहत किसी लोकसेवक के खिलाफ दायर आवेदन को अस्वीकार करने का अधिकार है, जहां आरोप पूरी तरह से निराधार, स्पष्ट रूप से बेतुके या इतने अंतर्निहित रूप से असंभव हैं कि कोई भी तर्कशील व्यक्ति यह निष्कर्ष नहीं निकाल सकता कि कोई अपराध प्रकट हुआ है।

पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, यह कहना अनावश्यक है कि अस्वीकृति का ऐसा आदेश मनमर्जी और कल्पना पर आधारित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके पीछे वैध कारण होने चाहिए।’’

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 175 में पुलिस अधिकारियों को मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना संज्ञेय मामलों की जांच करने की शक्ति का विस्तृत वर्णन किया गया है।

शीर्ष अदालत का यह निर्देश केरल उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें एक महिला का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का मुद्दा उठाया गया था।

भाषा

नेत्रपाल माधव

माधव