थरूर को लेकर रमेश ने कहा: कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी, विचारों का दमन नहीं करती

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थरूर को लेकर रमेश ने कहा: कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी, विचारों का दमन नहीं करती

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  • Publish Date - June 24, 2026 / 04:16 PM IST,
    Updated On - June 24, 2026 / 04:16 PM IST

नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शशि थरूर द्वारा कुछ मुद्दों पर पार्टी के रुख से अलग राय रखने को लेकर बुधवार को कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है, जो विभिन्न विचारों को रखने की अनुमति देती है और यही उसकी ताकत है।

रमेश ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को दिए एक साक्षात्कार में यह भी कहा कि कांग्रेस ऐसी पार्टी नहीं है, जो विचारों का ‘‘दमन करे।’’

हाल ही में थरूर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात को लेकर पार्टी के रुख से अलग राय व्यक्त की थी और कहा था कि मोदी ने नाविकों की मौत का विषय मजबूती से रखा है।

कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने थरूर पर निशाना साधते हुए कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि मोदी के प्रति थरूर का ‘‘आकर्षण’’ भौतिक दुनिया से भी आगे निकल गया है और अब वह ऐसी बातें भी सुनने में सक्षम हैं, जो प्रधानमंत्री ने ट्रंप के साथ बैठक में कही ही नहीं थीं।

हालांकि, तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के सांसद थरूर ने सफाई देते हुए कहा था कि उन्होंने सिर्फ भारतीय नाविकों की सुरक्षा का विषय उठाया था, जिसे दलगत विवाद का विषय बना दिया गया।

इसके अलावा, थरूर ने बीते रविवार को कहा था कि जम्मू-कश्मीर के अपने दौरे के दौरान उन्हें ‘सकारात्मक’ चीजें महसूस हुईं और इस केंद्र शासित प्रदेश में हालात सामान्य होने की दिशा में उत्साहजनक प्रगति हुई है।

पार्टी के रुख से अलग राय रखने वाने नेताओं के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने कहा, ‘‘हमारी पार्टी में बहुत ज्ञानी और अनुभवी नेता हैं, जिनके पास राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर कहने के लिए बहुत कुछ है। लेकिन हम एक लोकतांत्रिक पार्टी हैं। हम विभिन्न विचारों को सामने आने की अनुमति देते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम पार्टी मंचों पर खुली, पूर्ण और स्पष्ट चर्चा करते हैं। कभी-कभी लोग अलग दृष्टिकोण रखते हैं, लेकिन मैं इसे कांग्रेस पार्टी की ताकत मानता हूं। हम एक लोकतांत्रिक पार्टी हैं। हम ऊपर से निर्देश देने वाली पार्टी नहीं हैं। हम ऐसी पार्टी नहीं हैं, जो विचारों का दमन करती हो।’’

भाषा हक हक वैभव

वैभव