FCRA Amendment Bill 2026: मोदी सरकार रखेगी विदेशों से मिलने वाले चंदे के एक-एक रुपये का हिसाब.. सदन में लाया बिल तो भड़का विपक्ष, कह दी ये बात..

Congress Opposes FCRA Amendment Bill 2026: FCRA संशोधन बिल पर कांग्रेस का विरोध, इमरान मसूद का दावा, ईसाई और मुस्लिम समुदाय पर असर की आशंका।

FCRA Amendment Bill 2026: मोदी सरकार रखेगी विदेशों से मिलने वाले चंदे के एक-एक रुपये का हिसाब.. सदन में लाया बिल तो भड़का विपक्ष, कह दी ये बात..

FCRA Amendment Bill 2026 in Hindi || Image- iStock file

Modified Date: April 2, 2026 / 01:27 pm IST
Published Date: April 2, 2026 1:20 pm IST
HIGHLIGHTS
  • FCRA बिल पर कांग्रेस का तीखा विरोध
  • अल्पसंख्यकों पर असर का दावा
  • सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने की बात कही

नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा हैं। सहारनपुर के कांग्रेस सांसद ने बुधवार को कहा कि विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक से सबसे ज्यादा ईसाई समुदाय प्रभावित होने की संभावना है। (FCRA Amendment Bill 2026 in Hindi) उसके बाद मुसलमानों का नंबर आएगा। उन्होंने दावा किया कि यह कदम केरल विधानसभा चुनावों से जुड़ा है।

न्यूज एजेंसी से बात करते हुए मसूद ने कहा, “यह केरल चुनावों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इस विधेयक से सबसे ज्यादा ईसाई प्रभावित होंगे, और उसके बाद मुसलमान।” गौरतलब है कि, 25 मार्च को लोकसभा में पेश किए गए इस विधेयक का उद्देश्य विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन करना है, जिसके तहत भारत में विदेशी अंशदानों की पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाना है। हालांकि, विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि यह संशोधन संस्थानों पर केंद्रीकृत नियंत्रण स्थापित करने और अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

क्या है विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक?

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक दरअसल Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 (FCRA) में किए गए बदलावों से जुड़ा है, जिसे 2020 में संशोधित किया गया। इसका उद्देश्य भारत में आने वाले विदेशी धन (funding) को नियंत्रित करना और यह सुनिश्चित करना है कि इसका इस्तेमाल देश के हितों के खिलाफ न हो।

इस संशोधन के तहत कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए, जैसे कोई भी संस्था जो विदेशी चंदा लेती है, वह उसे किसी दूसरी संस्था को ट्रांसफर नहीं कर सकती। (FCRA Amendment Bill 2026 in Hindi) सभी फंड एक ही सरकारी बैंक खाते (State Bank of India की दिल्ली शाखा) में प्राप्त होंगे और प्रशासनिक खर्च की सीमा 50% से घटाकर 20% कर दी गई। इसका उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है, हालांकि कुछ संगठनों ने इसे सख्त और प्रतिबंधात्मक भी बताया है।

‘कांग्रेस भारत सरकार के साथ खड़ी हैं’ : इमरान मसूद

इसके अलावा, मसूद ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण जारी चुनौतियों के बीच पार्टी सरकार के साथ खड़ी है। मसूद ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि मौजूदा मुद्दों पर पहले कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा, “आज हमारे सामने गंभीर संकट खड़ा है। हम कुछ कर सकते थे, लेकिन हमारी ओर से कोई प्रयास नहीं किया गया। फिर भी, हम सरकार के साथ खड़े हैं। लेकिन सरकार को हमारा समर्थन स्वीकार करना होगा।” उनकी यह टिप्पणी ट्रंप के बुधवार (स्थानीय समय) को दिए गए बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था, “अगर कोई समझौता नहीं होता है, तो हम उनके सभी बिजली उत्पादन संयंत्रों पर बहुत कड़ा प्रहार करेंगे और संभवतः एक साथ ही ऐसा करेंगे।”

‘सरकार का नज़रिया समझना मुश्किल’ : सपा सांसद

इसी तरह संभल से सपा के सांसद ने भी इस संशोधन बिल का विरोध किया है। उन्होंने कहा, “सरकार FCRA को लेकर जो बिल ला रही है, हम उसका विरोध करते हैं, सरकार का इस बिल को ज़बरदस्ती लाना गलत है। एक तरफ तो सरकार यह भी कह रही थी कि वे बिल नहीं ला रहे हैं, दूसरी तरफ सुनिए, सरकार का नज़रिया समझना मुश्किल है। हो सकता है कि विपक्ष के विरोध के बाद वे पीछे हट रहे हों, लेकिन मैं कहूंगा कि ऐसा बिल, जो हमें सही नहीं लगता, हम उसका विरोध करेंगे।”

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