बेंगलुरु, आठ जुलाई (भाषा) कर्नाटक भाजपा ने बुधवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को एक ज्ञापन सौंपा और इसमें कांग्रेस पर एसआईआर के खिलाफ “गुमराह करने वाली, झूठी और डर फैलाने वाली” जानकारी प्रसारित करने का आरोप लगाया।
भाजपा ने सीईओ से यह भी आग्रह किया कि वे कर्नाटक कांग्रेस और उसके कार्यकर्ताओं के खिलाफ उचित कार्रवाई करें और उन्हें राज्य में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) की संवैधानिक प्रक्रिया में गैर-कानूनी रूप से दखल देने से रोकें।
भाजपा के राज्य संयोजक एस. दत्तात्री और पार्टी के राज्य विधिक प्रकोष्ठ के संयोजक वसंतकुमार ने यहां मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार को ज्ञापन सौंपा।
कर्नाटक में एसआईआर के तहत घर-घर जाकर गणना का काम 30 जून को शुरू हुआ था और यह 29 जुलाई तक चलेगा।
ज्ञापन में एक पैम्फलेट की प्रति के साथ कहा गया, “अभी की स्थिति यह है कि कर्नाटक में आईएनसी (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस) सोशल मीडिया और भौतिक रूप से ऐसे पैम्फलेट बांट रही है जिनमें भाजपा पर झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं कि एसआईआर प्रक्रिया उसके कहने पर की जा रही है। इसके उलट, निर्वाचन आयोग और उसके अधिकारी सिर्फ अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।”
भाजपा ने कहा कि पैम्फलेट में यह आरोप भी लगाया गया है कि चुनाव आयोग ने भाजपा के साथ मिलकर बिना उचित प्रक्रिया के मतदाता सूची से नाम हटा दिए हैं।
ज्ञापन में कहा गया, “ये व्यापक और बेबुनियाद आरोप आपके माननीय प्राधिकरण द्वारा निभाए जा रहे संवैधानिक दायित्व पर सीधा हमला हैं। साथ ही, यह पैम्फलेट कर्नाटक में निर्वाचन आयोग द्वारा अपनाई जा रही एसआईआर प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधे सवाल उठाता है और कहता है कि सिर्फ आईएनसी-कर्नाटक ही नागरिकों के वोटों की सुरक्षा कर सकती है।”
भाजपा ने कहा कि ये “बेबुनियाद और अनुचित” आरोप सीधे तौर पर चुनाव आयोग के तहत आने वाले सीईओ, जिला चुनाव अधिकारी (डीईओ), मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ), अतिरिक्त ईआरओ और अन्य सरकारी कर्मचारियों को उनके संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करने से रोक सकते हैं या प्रभावित कर सकते हैं।
भाजपा का कहना है कि फैलाई जा रही ये झूठी और मनगढ़ंत जानकारी नागरिकों के मन में आशंका पैदा करती है और घर-घर जाकर आंकड़े इकट्ठा करते समय चुनाव अधिकारियों के मन में असुरक्षा की भावना भी पैदा कर सकती है, जिससे उन पर हिंसा का खतरा बढ़ सकता है।”
उसने कहा, “इसलिए, अनुरोध है कि यह माननीय प्राधिकरण कर्नाटक में आईएनसी और उसके कार्यकर्ताओं के खिलाफ उचित कार्रवाई करे और उन्हें एसआईआर की संवैधानिक प्रक्रिया में गैर-कानूनी रूप से दखल देने से रोके।”
भाषा प्रशांत मनीषा
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