मुकदमा-पूर्व चरण में आपराधिक प्रक्रिया को समाप्त करने के परिणाम गंभीर हो सकते हैं: न्यायालय

मुकदमा-पूर्व चरण में आपराधिक प्रक्रिया को समाप्त करने के परिणाम गंभीर हो सकते हैं: न्यायालय

मुकदमा-पूर्व चरण में आपराधिक प्रक्रिया को समाप्त करने के परिणाम गंभीर हो सकते हैं: न्यायालय
Modified Date: November 29, 2022 / 07:48 pm IST
Published Date: April 26, 2022 9:36 pm IST

नयी दिल्ली, 26 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि मुकदमे के पूर्व चरण में आपराधिक प्रक्रिया को खत्म करने के परिणाम गंभीर और अपूरणीय हो सकते हैं।

न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत चेक बाउंस मामले में मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी समन को रद्द करने का आग्रह करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।

इसने कहा, ‘मुकदमे के पूर्व चरण में आपराधिक प्रक्रिया को खत्म करने के परिणाम गंभीर और अपूरणीय हो सकते हैं।’’ पीठ ने कहा कि प्रारंभिक चरणों में कार्यवाही को समाप्त करने का परिणाम पक्षकारों को साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिए बिना मामले को खत्म करने का होगा।

पीठ ने कहा कि अगर इसकी अनुमति दी जाती है तो आरोपी को आपराधिक प्रक्रिया में अनुचित लाभ मिल सकता है।

इसने कहा कि ऐसी स्थिति में जहां आरोपी मुकदमा शुरू होने से पहले ही इसे रद्द करने के लिए अदालत का रुख कर ले, अदालत का रुख इतना सावधानी भरा होना चाहिए कि शिकायत का समर्थन करने वाली कानूनी धारणा की अवहेलना कर मामले को समय से पहले खत्म न किया जाए।

मामला उच्च न्यायालय के बाद शीर्ष अदालत पहुंचा था।

भाषा नेत्रपाल पवनेश

पवनेश


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