शिकारी जीवों का संरक्षण प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका: भूपेंद्र यादव

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शिकारी जीवों का संरक्षण प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका: भूपेंद्र यादव

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  • Publish Date - May 14, 2026 / 07:37 PM IST,
    Updated On - May 14, 2026 / 07:37 PM IST

(फाइल फोटो सहित)

सासन गिर (गुजरात), 14 मई (भाषा) केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका शीर्ष शिकारी प्रजातियों का संरक्षण सुनिश्चित करना है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रकृति उन्हीं की रक्षा करती है जो उसकी रक्षा करते हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि शेरों की गणना के 2025 के आंकड़ों ने यह साबित कर दिया है कि गुजरात शेर संरक्षण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री जूनागढ़ जिले के सासन गिर शेर अभयारण्य में शेर संरक्षण पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह नयी दिल्ली में आयोजित होने वाले ‘इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस’ (आईबीसीए) शिखर सम्मेलन 2026 से पहले विशेष कार्यक्रमों का हिस्सा है।

उन्होंने कहा, ‘‘विश्व के सभी राष्ट्रों को खासकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग, जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने, ज्ञान का आदान-प्रदान करने, दक्षता विकास और उत्कृष्ट संरक्षण प्रथाओं को अपनाने के मामले में एकजुट होना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि भविष्य में आईबीसीए वैश्विक दक्षताओं को मजबूत करने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा।

यादव ने कहा, ‘‘प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका शीर्ष शिकारी जीवों का संरक्षण और बचाव सुनिश्चित करना है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम प्रकृति संरक्षण का एक ऐसा मॉडल स्थापित करना चाहते हैं जहां पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था दोनों साथ-साथ फल-फूल सकें। आज, वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न सबसे बड़ा खतरा प्रकृति के साथ हमारे पारिस्थितिक संतुलन का बिगड़ना है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जहां दुनिया के बाकी हिस्सों में शेरों की संख्या में 30 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है, वहीं गुजरात में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।’’

मंत्री ने सासन गिर को भारत की समृद्ध जैव विविधता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक बताया।

उन्होंने कहा कि प्रभावी संरक्षण और प्रबंधन प्रयासों से गिर क्षेत्र के कई इलाकों में शेरों की आबादी को स्थिर करने और बढ़ाने में मदद मिली है।

कार्यक्रम को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि केंद्र की 2,000 करोड़ रुपये की परियोजना ‘प्रोजेक्ट लायन’ न केवल शेरों के संरक्षण के लिए बल्कि ‘ग्रेटर गिर’ के समग्र विकास के हिस्से के रूप में स्थानीय समुदायों के आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए भी लाभदायक होगी।

पटेल ने कहा, ‘‘गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में मोदी द्वारा अपने कार्यकाल के दौरान गिर अभयारण्य और शेर संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों ने पूरे देश में संरक्षण प्रयासों को गति दी है।’’

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा पारिस्थितिकी को भावनाओं से जोड़कर और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनाया गया दृष्टिकोण गुजरात में सफलतापूर्वक साकार हुआ है।

यादव के अनुसार, शेर संरक्षण को प्राथमिकता देने और वन विभाग की बेहतरीन सक्रिय पहल के परिणामस्वरूप, शेरों की संख्या, जो 1991 में 284 थी, अब बढ़कर लगभग 891 हो गई है।

भाषा आशीष शफीक

शफीक