मिजोरम: कांग्रेस ने मणिपुर में हुए हमले की निंदा की

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मिजोरम: कांग्रेस ने मणिपुर में हुए हमले की निंदा की

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  • Publish Date - May 14, 2026 / 07:31 PM IST,
    Updated On - May 14, 2026 / 07:31 PM IST

आइजोल, 14 मई (भाषा) मिजोरम के कई चर्च और राज्य कांग्रेस इकाई ने मणिपुर के कांगपोकपी जिले में घात लगाकर किए गए हमले की बृहस्पतिवार को कड़ी निंदा की और इसे हिंसा का एक जघन्य कृत्य और ईसाई समुदाय के लिए एक बड़ी क्षति बताया।

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में बुधवार को संदिग्ध उग्रवादियों के हमले में एक चर्च के तीन पदाधिकारियों की मौत हो गई थी।

मिजोरम के नौ प्रमुख चर्च के समूह ‘काउंसिल ऑफ चर्चेस इन मिजोरम’ (सीसीएम) ने एक बयान में कांगपोकपी जिले के कोट्जिम और कोटलेन गांवों के बीच दो वाहनों पर हुए हमले पर ‘‘गहरा दुख’’ व्यक्त किया।

सीसीएम ने कहा कि इस हमले ने पूर्वोत्तर के सभी ईसाइयों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

हिंसा की निंदा करते हुए, सीसीएम ने कहा कि ऐसे कृत्य केवल विभाजन को बढ़ाते हैं और सांप्रदायिक सद्भाव को कमजोर करते हैं।

इसने ईसाइयों से मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति की बहाली के लिए प्रार्थना करने की अपील की।

इसी बीच, मिजोरम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) ने भी थाडौ बैपटिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (टीबीएआई) के तीन पदाधिकारियों की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए एक संदेश जारी किया।

कांग्रेस ने मारे गए लोगों को ‘‘शांति और सुलह के दूत’’ बताया, जो मणिपुर में जारी अशांति के बीच अथक रूप से काम कर रहे थे।

पार्टी ने कहा, ‘‘शांति की खोज में उनका बलिदान एक बहुत बड़ी क्षति है।’’

एमपीसीसी ने शोक संतप्त परिवारों और पूरे टीबीएआई समुदाय के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए हमले में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।

पुलिस ने बताया था कि मणिपुर के कांगपोकपी जिले में बुधवार को संदिग्ध उग्रवादियों के हमले में चर्च के तीन पदाधिकारियों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए।

पुलिस के अनुसार यह घटना कोट्जिम और कोटलेन गांवों के बीच उस समय घटी थी जब थाडौ बैपटिस्ट एसोसिएशन (टीबीए) के सदस्य एक धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद चुराचांदपुर से लौट रहे थे।

मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ इस तरह की ‘हिंसा की निरर्थक घटनाएं’ मणिपुर में शांति के लिए खतरा हैं, जो 2023 से जातीय हिंसा से त्रस्त है।

भाषा

देवेंद्र पवनेश

पवनेश