नयी दिल्ली, 15 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को गंगा नदी के किनारों और बाढ़ के मैदानी क्षेत्रों में अवैध निर्माणों पर एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करने और अतिक्रमण हटाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र सरकार से गंगा के पुनर्जीवन, संरक्षण और प्रबंधन संबंधी अधिसूचना के कार्यान्वयन और क्रियान्वयन के लिए अब तक उठाए गए कदमों को रिकॉर्ड पर रखने को कहा।
इसने कहा, ‘‘उपरोक्त अधिसूचना के बेहतर और प्रभावी कार्यान्वयन में प्राधिकरण (स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन प्राधिकरण) के सामने कौन-कौन सी बाधाएं या रुकावटें आ रही हैं?’’
पीठ ने कहा, ‘‘उपर्युक्त सभी राज्यों से होकर बहने वाली गंगा नदी की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि नदी के मैदानी क्षेत्र और किनारे सभी प्रकार के अतिक्रमणों से मुक्त हों, प्राधिकरण क्या कदम उठाने का इरादा रखता है?’’
उच्चतम न्यायालय ने गंगा बेसिन के कई राज्यों को नोटिस जारी किया और कहा कि इस मुद्दे पर व्यक्तिगत मामलों से परे व्यापक जांच की आवश्यकता है।
इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।
उच्चतम न्यायालय पटना निवासी अशोक कुमार सिन्हा द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें उन्होंने एनजीटी के 30 जून, 2020 के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील बाढ़ के मैदानी क्षेत्रों में अवैध निर्माण और स्थायी अतिक्रमण के खिलाफ उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था।
भाषा देवेंद्र नरेश
नरेश