नयी दिल्ली, 15 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) को नोएडा स्पोर्ट्स सिटी विकसित करने से संबंधित अटकी हुई रियल एस्टेट परियोजना पर उसके निर्देशों का पालन करने के लिए अंतिम मौका दिया है।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह आदेश पारित किया।
पीठ ने कहा कि अंतिम अवसर के रूप में, इस न्यायालय द्वारा दिनांक 24 नवंबर, 2025 और 15 जनवरी, 2026 को पारित पूर्व आदेशों का पालन प्रतिवादी नोएडा को करना होगा।
शीर्ष अदालत ने 24 नवंबर के आदेश में लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन और उसके कंसोर्टियम साझेदारों द्वारा विकसित की जा रही परियोजना के लिए एक संरचित पुनरुद्धार (रिवाइवल) ढांचे को मंजूरी दी थी।
न्यायालय ने लगभग तीन साल बाद निर्माण कार्य फिर से शुरू करने की अनुमति दी थी और नोएडा प्राधिकरण को 30 से 45 दिनों के भीतर निर्माणकर्ता पर लगा प्रतिबंध हटाने का निर्देश दिया था, बशर्ते तय शर्तों का पालन किया जाए।
इस ढांचे के तहत निर्माणकर्ता को 30 दिनों के भीतर संशोधित मास्टर प्लान जमा करना होगा, जिसकी जांच प्राधिकरण करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मूल स्पोर्ट्स सिटी नीति का पालन हो रहा है।
हालिया आदेश के बाद नोएडा प्राधिकरण ने नोएडा सेक्टर-150 स्थित एससी-02 स्पोर्टस सिटी परियोजना से प्रतिबंध हटा दिया है। प्राधिकरण के इस कदम से उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी मिश्रित उपयोग (मिक्स्ड-यूज) परियोजनाओं में से एक के पुनरुद्धार का अगला चरण शुरू होने का संकेत मिला है।
यह फैसला प्राधिकरण की 221वीं बोर्ड बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता अवसंरचना और औद्योगिक विकास आयुक्त तथा प्राधिकरण के चेयरमैन दीपक कुमार ने की।
नोएडा के सेक्टर-150 में फैली इस स्पोर्ट्स सिटी परियोजना को खेल अवसंरचना के साथ आवासीय और व्यावसायिक सुविधाओं को जोड़ने वाले प्रमुख विकास के रूप में तैयार किया गया था।
इस परियोजना में घर खरीदने वाले हजारों लोगों ने निवेश किया था, जिसमें स्पोर्ट्स अकादमी, प्रशिक्षण सुविधाएं और अन्य संबंधित सुविधाओं के साथ आवास और रिटेल स्पेस का वादा किया गया था। हालांकि जनवरी 2021 में नियामकीय कार्रवाई के बाद सभी चार स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं पर प्रतिबंध लग गया था जिससे कारण लगभग 20,000 खरीदारों को कब्जा मिलने या पंजीकरण की प्रक्रिया अब भी लंबित है।
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