Vande Bharat/Image Credit: IBC24.in
Vande Bharat: नई दिल्ली: देश में चुनाव भले 4 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हो रहे हों, लेकिन सबकी नजर बंगाल पर लगी हुई है। जहां बीजेपी तमाम कोशिशे करने के बाद भी TMC का गढ़ भेद नहीं पाई है। बीजेपी और TMC प्रमुख ममता बनर्जी के बीच सियासी रंजिश जगजाहिर है।
पश्चिम बंगाल में जब कभी भी विधानसभा चुनाव होते हैं, पूरे देश की नजर उस पर लग जाती है, क्योंकि ममता बनर्जी बंगाल की तेज तर्रार सीएम के रूप में पहचानी जाती है और बीते डेढ़ दशक से ममता की TMC का बंगाल पर एकछत्र राज है और बीजेपी TMC के इस गढ़ को भेदने को बेताब है। 2021 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो TMC ने विधानसभा की 294 सीटों में से 213 सीट जीतकर सत्ता में (Vande Bharat) शानदार वापसी की थी। जबकि बीजेपी 77 सीट ही जीत सकी थी। वहीं कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल पाई थी। अन्य के खाते में 4 सीटें आई थी।
Vande Bharat: साफ है कि, बंगाल में ममता की TMC काफी मजबूत स्थिति में है। 2021 के चुनाव में TMC ने 48% वोट हासिल किए थे। जबकि बीजेपी को 38 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन दिलचस्प बात ये है कि 2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का वोट प्रतिशत 10 फीसदी ही था।
यही वजह है कि बीजेपी 2026 में बंगाल में सत्ता का सुख पाने की उम्मीद कर रही है। TMC भी इसे लेकर सतर्क है (Vande Bharat) यही वजह है कि बीजेपी के हिंदू कार्ड की काट के लिए ममता ने चुनाव की तारीखों के ऐलान के ठीक पहले बड़ा दांव चल दिया। ममता ने बंगाल के पुरोहितों और मुअज्जिनों को दिया जाने वाले मासिक मानदेय बढ़ाने का ऐलान कर दिया।
ममता बनर्जी ने X पर लिखा मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि हमारे पुरोहितों और मुअज्जिनों को दिए जाने वाले मासिक मानदेय में 500 रुपए की वृद्धि की गई है। इनकी सेवा ही हमारे समुदायों के आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन को बनाए रखती है। इस संशोधन के साथ अब उन्हें प्रति माह 2 हजार रुपए मिलेंगे। हमारा प्रयास ये सुनिश्चित करना है कि हमारी समृद्ध आध्यात्मिक विरासत के संरक्षकों को वो पहचान और सहयोग मिले जिसके वे हकदार हैं।
Vande Bharat: दूसरी तरफ चुनाव आयोग के तारीखों के ऐलान से ठीक एक दिन पहले पीएम मोदी ने शनिवार को बंगाल में बड़ा दांव खेला। (Vande Bharat) करोड़ों रुपए की विकास परियोजना के लोकार्पण, शिलान्यास के साथ ममता सरकार पर जमकर बरसे थे। TMC को अत्याचारी शासन बताकर निशाना साधा था।
बंगाल की ममता सरकार और केंद्र की मोदी सरकार में 36 का आंकडा रहा है। चाहे GST के बकाये के भुगतान की बात हो या फिर राज्य में SIR और ED की छापे की कार्रवाई की। दोनों में सीधा टकराव देखने को मिला है। अब चूंकि चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका तो ये तय है कि दोनों में जोरदार टक्कर देखने को मिलेगा। (Vande Bharat) वहीं चुनाव आयोग के लिए भी राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना किसी चुनौती से कम नहीं है क्योंकि बंगाल में चुनावी हिंसा का पुराना इतिहास रहा है।
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