नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के ‘‘दो पत्तियां’’ चुनाव चिह्न से जुड़े धन शोधन मामले में कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर को मंगलवार को जमानत दे दी।
अदालत ने कहा कि वह धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत निर्धारित अधिकतम सात साल की सजा के आधे से अधिक समय तक हिरासत में रह चुका है।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा, ‘‘स्वतंत्रता को संविधान में सबसे पवित्र मानक माना गया है। अदालतें विशेष कानूनों या आर्थिक अपराधों को ढाल बनाकर सरकार के साथ साठगांठ करते हुए अपने फैसलों में केवल स्वतंत्रता का उपदेश नहीं दे सकतीं।’’
चंद्रशेखर इस मामले में एक अप्रैल, 2022 से जेल में है। हालांकि वह अपने खिलाफ दर्ज अन्य लंबित मामलों में जेल में ही रहेगा। उसे अपने खिलाफ दर्ज 31 मामलों में से 26 में जमानत मिल चुकी है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का मामला 2017 में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि चंद्रशेखर ने अन्नाद्रमुक नेता टी टी वी दिनाकरन के लिए मध्यस्थ के रूप में काम किया और वी के शशिकला के नेतृत्व वाले गुट के लिए पार्टी का ‘दो पत्ती’ चिह्न हासिल करने के संबंध में निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी को रिश्वत देने की कोशिश की।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि आरोपी के पास से 1.3 करोड़ रुपये बरामद किए गए, जिसका कथित तौर पर अन्नाद्रमुक के शशिकला गुट के लिए अनुकूल चुनाव चिह्न प्राप्त करने को लेकर निर्वाचन आयोग पर अनुचित प्रभाव डालने के लिए इस्तेमाल किया जाना था।
ईडी के अनुसार, चंद्रशेखर ने दिनाकरन के साथ मिलकर दो करोड़ रुपये की आपराधिक आय अर्जित करने के लिए समन्वय किया और इसे चेन्नई से दिल्ली स्थानांतरित कराया। बाद में उसने 63.78 लाख रुपये की इस राशि का इस्तेमाल किया और कुछ भुगतान करके इसे वैध धन के रूप में दिखाने की कोशिश की।
अदालत ने कहा कि धन शोधन का अपराध गंभीर प्रकृति का है, लेकिन पीएमएलए जैसे विशेष कानून का इस्तेमाल आरोपी की स्वतंत्रता पर अदालत के माध्यम से सरकार द्वारा दबाव बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इस प्रकार, आरोपी के खिलाफ 31 मामलों (वर्तमान मामले सहित) का होना भी इस विशेष मामले में उसके जमानत के अधिकार को प्रभावित नहीं करता, जब कि उसकी हिरासत की अवधि पीएमएलए की धारा 4 के तहत प्रस्तावित सजा की आधी अवधि से अधिक हो गई हो, और खासकर तब जब वह 31 मामलों में से 26 मामलों में पहले ही जमानत पर हो।’’
अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले और मूल अपराध में कार्यवाही को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा प्रभावी रूप से रोक दिया गया था, और वर्तमान मामले में ‘‘आरोपी ने न केवल मुकदमे के दौरान अत्यधिक हिरासत झेली है, बल्कि उसे बिना मुकदमे के और भी लंबे समय तक हिरासत में रहना पड़ेगा।’’
जमानत याचिका पर एजेंसी के ‘‘कड़े विरोध’’ को खारिज करते हुए, न्यायाधीश ने कहा कि मुकदमे की शीघ्र सुनवाई असंभव है और ‘‘आरोपी की परिस्थितियां’’ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 479 (1) के तहत उसे लगभग अनिवार्य लाभ प्रदान करने के लिए ‘‘उपयुक्त’’ हैं।
इस प्रावधान के अनुसार, जो व्यक्ति विचाराधीन कैदी के रूप में अधिकतम सजा की आधी अवधि पूरी कर चुका है उसे जमानत पर रिहा किया जाएगा, सिवाय उन अपराधों के जिनमें मृत्युदंड या आजीवन कारावास का प्रावधान है।
न्यायाधीश ने चंद्रशेखर को पांच लाख रुपये की जमानत राशि और इतनी ही रकम के निजी मुचलके के साथ सशर्त जमानत दे दी।
भाषा आशीष माधव
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