नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर के अपने पड़ोसियों पर नस्ली टिप्पणी करने के आरोपी दंपति को नियमित जमानत दे दी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समर विशाल, आरोपी हर्षप्रिय सिंह और रूबी जैन की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिन्हें 11 मार्च को दी गई 30 दिन की अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने पर अदालत के समक्ष पेश किया गया था।
इस मामले में अभियुक्तों का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता अविनाश कुमार, बी.पी. सिंह और सुमंत बारिक ने किया। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा कि दंपति ने पिछले आदेश में दी गयी जमानत की सभी शर्तों का पालन किया है।
वकीलों ने बताया कि उन्होंने मालवीय नगर स्थित उस इमारत में अपना आवास खाली कर दिया था, जहां घटना घटी थी, और एक नए इलाके में स्थानांतरित हो गए थे। उन्होंने बताया कि दंपति ने जांच अधिकारी (आईओ) को उनके नए पते और संपर्क जानकारी से अवगत करा दिया था।
वकीलों ने न्यायाधीश को यह भी आश्वस्त किया कि रूबी जैन को टीबी की बीमारी के लिए लगातार दवा दी जा रही है, और इसके लिए अस्पताल के दस्तावेज उपलब्ध हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि इस मामले के कारण विवाहित जोड़े की प्रतिष्ठा को काफी नुकसान पहुंचा है। दंपति ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से और अपने मकान मालिक की उपस्थिति में पीड़ितों से व्यक्तिगत रूप से माफी भी मांगी थी।
अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहीं अधिवक्ता लियी नोशी ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए आग्रह किया कि नस्लवाद के ऐसे गंभीर मामलों को इतनी आसानी से न छोड़कर एक “संदेश दिया जाना चाहिए”।
उन्होंने अदालत के समक्ष कहा कि राज्य में जारी जातीय हिंसा के बीच पीड़ितों में से एक को मणिपुर वापस जाना पड़ा।
उन्होंने कहा, “हो सकता है कि इससे उन्हें कोई शारीरिक चोट न आई हो, लेकिन इसने उन्हें कई अन्य तरीकों से नुकसान पहुंचाया और भविष्य के अवसरों का एक महत्वपूर्ण नुकसान हुआ।”
आरोपी दंपति को 25 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में पूर्वोत्तर की तीन महिलाओं पर नस्ली टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
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