न्यायालय ने अनुच्छेद 370 मामले में संघवाद की परख का अहम मौका गंवा दिया: खुर्शीद

न्यायालय ने अनुच्छेद 370 मामले में संघवाद की परख का अहम मौका गंवा दिया: खुर्शीद

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  • Publish Date - January 20, 2026 / 11:54 AM IST,
    Updated On - January 20, 2026 / 11:54 AM IST

नयी दिल्ली, 20 जनवरी (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के सरकार के आश्वासन को स्वीकार करने के बाद अनुच्छेद 370 के मामले में संघवाद के ‘‘उच्च स्तर’’ की परख करने का एक महत्वपूर्ण मौका गंवा दिया।

खुर्शीद ने सोमवार को पत्रकार-लेखक बशीर असद की दो पुस्तकों, ‘कश्मीर: द अनफ़िल्टर्ड ट्रुथ’ और ‘हाउस विदाउट विटनेस’ के विमोचन के मौके यह भी कहा कि हालांकि संविधान बंधुत्व, समता और स्वतंत्रता की बात करता है, लेकिन न्यायिक व्याख्या में संघवाद को हमेशा वह महत्व नहीं मिला है जिसके वह हकदार है।

उन्होंने कहा, ‘‘संघवाद वह विषय है, जिस पर शायद हम तब चूक गए, जब उच्चतम न्यायालय के पास इसे उठाने का एक अवसर था, क्योंकि यह संघवाद की सच्ची कसौटी का मामला था… एक निर्णायक क्षण था, जब अनुच्छेद 370 से जुड़ा मामला उच्चतम न्यायालय के सामने आया, ताकि संघवाद की उसके उच्चतम स्वरूप की जांच की जा सके।’’

खुर्शीद ने कहा, ‘हालांकि, अटॉर्नी जनरल द्वारा सरकार की तरफ से पूर्ण राज्य की बहाली को लेकर दिए गए आश्वासन पर न्यायालय ने महसूस किया कि उसे इस विचार में जाने और इसकी परख से दुनिया को परेशान करने की जरूरत नहीं है।’

उच्चतम न्यायालय ने 11 दिसंबर, 2023 को अनुच्छेद 370 को निरस्त करने संबंधी से सरकार के निर्णय को बरकरार रखा था, जो जम्मू कश्मीर को एक विशेष दर्जा देता था। न्यायालय ने यह आदेश भी दिया था इसका राज्य का दर्जा ‘जल्द से जल्द’ बहाल किया जाए।

पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि सरल शब्दों में संघवाद को ‘अनेकता में एकता’ के रूप में वर्णित किया जा सकता है। उनका कहना था कि भारत की ताकत इसकी विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और जीवन के तरीकों में निहित है, जो साझा मूल्यों से एक साथ बंधे हैं।

भाषा हक गोला शोभना मनीषा

शोभना