नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी चीजें फेसबुक पर डालने के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश को बरकरार रखा।
अदालत ने कहा कि अपराध में इस्तेमाल मोबाइल फोन भले ही बरामद नहीं हुआ हो, लेकिन अगर डिजिटल सबूतों से यह साबित होता है कि फेसबुक अकाउंट आरोपी का है, तो मामले की सुनवाई पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
आदित्य बिस्वास की पुनर्विचार याचिका पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी की अदालत सुनवाई कर रही थी। बिस्वास ने उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67बी के तहत आरोप तय करने का निर्देश देने से संबंधित निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी।
यह धारा बच्चों से संबंधित यौन सामग्री प्रकाशित या प्रसारित किए जाने के मामलों से संबंधित है।
दिल्ली की अदालत ने 27 जुलाई के अपने आदेश में कहा, “अगर डिजिटल सबूत, खासकर आईपी लॉग और सब्सक्राइबर की जानकारी से स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया अकाउंट आरोपी के नियंत्रण में था और उसी पर सामग्री डाली गई थी, तो केवल मोबाइल फोन बरामद नहीं होने के आधार पर आरोप तय करने से इनकार नहीं किया जा सकता।”
यह मामला दिसंबर 2022 में दक्षिण दिल्ली साइबर पुलिस थाने में दर्ज की गई प्राथमिकी से जुड़ा है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार ‘नीम बिस्वास’ नामक अकाउंट पर 17 सेकेंड का एक वीडियो डाला गया था, जिसमें एक बच्चा अश्लील यौन हरकत करता हुआ दिख रहा था।
भाषा जोहेब प्रशांत
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