अलप्पुझा (केरल), 13 जुलाई (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के साथ बढ़ते विवाद के बीच अंबलप्पुझा के विधायक जी. सुधाकरन ने सोमवार को पार्टी नेताओं पर तंज कसते हुये कहा कि माकपा नेताओं को जनता के साथ सही व्यवहार करना सीखने के लिए ‘बुजुर्गों की पाठशाला’ में जाना चाहिए।
यह ताजा बयानबाजी उस समय सामने आई है, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता रहे जी सुधाकरन ने पार्टी की अपनी सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया और बाद में अंबलप्पुझा विधानसभा क्षेत्र से संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।
हाल ही में माकपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी और इसके नेताओं की लगातार आलोचना करने को लेकर सुधाकरन का विरोध किया था। इसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने अलप्पुझा में स्थित उनके विधायक कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला।
माकपा ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि यदि सुधाकरन पार्टी के खिलाफ अपनी टिप्पणियां जारी रखते हैं, तो पार्टी इसका कड़ा जवाब देगी।
अलप्पुझा में लोगों को संबोधित करते हुए सुधाकरन ने उस विरोध प्रदर्शन का जिक्र किया और कहा कि बड़ी संख्या में लोग नारे लगाते हुए उनके घर की ओर मार्च कर रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘सबसे पहले आप सभी को बुजुर्गों की पाठशाला में जाकर पढ़ाई करनी चाहिए। माकपा नेताओं को बुजुर्गों के लिए बनाए गए शिक्षण संस्थानों में जाकर यह सीखना चाहिए कि जनता के साथ सम्मानपूर्वक कैसे व्यवहार किया जाता है।’’
प्रदर्शनकारियों के आचरण पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि क्या विरोधियों के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने का कोई मतलब है?
उन्होंने कहा, ‘‘क्या गाली-गलौज करने का कोई फायदा है। क्या इसी वजह से आपकी पूरी तरह हार नहीं हुई। मैं यह बात माकपा के सदस्यों को सोचने के लिए कह रहा हूं। मैं किसी से अपनी पार्टी बदलने के लिए नहीं कह रहा हूं। लेकिन इन लोगों ने मेरे घर तक मार्च क्यों निकाला और गालियां क्यों दीं?’’
सुधाकरन ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस को अभी तक यह एहसास नहीं हुआ है कि सरकार बदल चुकी है।
उन्होंने कहा, “अलप्पुझा पुलिस को इसकी बिल्कुल जानकारी नहीं है। वे अब भी उसी पुराने तरीके से काम कर रहे हैं। आपको किसी के पक्ष में झुकने या किसी के प्रति दुश्मनी दिखाने की जरूरत नहीं है। बस अपना कर्तव्य निभाइए।’’
उन्होंने कहा कि उन्हें किसी के पक्षपातपूर्ण समर्थन की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा, “मैंने कभी किसी पुलिस अधिकारी को फोन करके यह नहीं कहा कि किसी को गिरफ्तार किया जाए। लेकिन उन्हें अपनी मनमानी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अगर ऐसा हुआ तो मैं अपनी आवाज उठाऊंगा। मुझे जनता का जनादेश मिला है। आपको याद रखना चाहिए कि मैंने 28,000 मतों के अंतर से जीत हासिल की है।’’
भाषा रंजन नरेश संतोष
संतोष