नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) सरकार ने बुधवार को राज्यसभा को बताया कि 2011 में शुरू की गई राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम न्यूनीकरण परियोजना (एनसीआरएमपी) के तहत अब तक कुल 4,331.68 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जिसका उद्देश्य तटीय राज्यों में आपदा से निपटने की क्षमता को मजबूत करना है।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक लिखित उत्तर में बताया कि परियोजना के पहले चरण को जनवरी 2011 में मंजूरी दी गई थी, जिसके तहत 2,524.84 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि जुलाई 2015 में स्वीकृत दूसरे चरण के तहत 1,806.84 करोड़ रुपये व्यय किए गए।
नित्यानंद राय ने कहा कि एनसीआरएमपी का उद्देश्य चक्रवातों के प्रति संवेदनशीलता को कम करने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित करना और तटीय समुदायों एवं परिसंपत्तियों को आपदा-प्रतिरोधी बनाना है। साथ ही पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना भी इसका लक्ष्य है।
यह परियोजना आठ तटीय राज्यों में दो चरणों में लागू की गई। पहला चरण आंध्र प्रदेश और ओडिशा में लागू किया गया, जो दिसंबर 2018 में पूरा हुआ।
दूसरा चरण गोवा, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में लागू किया गया, जो मार्च 2023 में पूरा हुआ।
परियोजना के प्रमुख घटकों में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, बहुउद्देश्यीय चक्रवात आश्रय, निकासी सड़कें और पुल, खारे पानी से सुरक्षा तटबंध, भूमिगत केबलिंग और क्षमता निर्माण कार्यक्रम शामिल हैं।
मंत्री ने बताया कि परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों के माध्यम से क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि समन्वय और निगरानी के लिए केंद्र स्तर पर एक परियोजना निगरानी इकाई स्थापित की गई, जबकि राज्यों में भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाई गई।
भाषा मनीषा माधव
माधव