(नीलम बाघा)
नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) दिल्ली में लगातार चौथे दिन शुक्रवार को भी जंतर-मंतर के आस-पास दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशन बंद रहे, जिससे सैकड़ों छात्रों और प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शन स्थल तक पैदल जाना पड़ा।
नयी दिल्ली मेट्रो स्टेशन और मिंटो ब्रिज के बीच, इस लंबी और अंतहीन पैदल यात्रा के दौरान एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि यह कुछ-कुछ दांडी मार्च जैसा महसूस हो रहा था।
कुछ ही देर बाद, समूह ने देखा कि महात्मा गांधी की वेशभूषा में एक व्यक्ति उनके साथ-साथ चल रहा है।
हालांकि, यह संयोग महज कुछ ही सेकंड तक रहा। समूह ने ‘‘बापू की जय’’ का जोरदार नारा लगाया। इस तरह, कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन के मुख्य केंद्र जंतर-मंतर तक पैदल जाने वाले कई लोगों के लिए यह दृश्य एक सबसे यादगार लम्हा बन गया।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन जंतर-मंतर के आस-पास के 17 मेट्रो स्टेशन बंद रखे, प्रदर्शन स्थल तक पहुंचना अपने आप में एक अलग यात्रा बन गई है।
अब यह एक आम दृश्य बन चुका है। छात्र जंतर-मंतर से कई किलोमीटर की दूरी पर स्थित स्टेशन पर उतरते हैं और प्रदर्शन स्थल की ओर पैदल आगे बढ़ते हैं जिससे धीरे-धीरे सड़कों पर लोगों की लंबी कतारें बन जाती हैं।
जंतर-मंतर के नजदीकी स्टेशन के बंद होने की सूचना मिलने पर नयी दिल्ली स्टेशन से अपनी यात्रा शुरू करने वाले हर्षित सेठ ने कहा, ‘‘हम प्रदर्शनकारियों के एक समूह के साथ रेलवे स्टेशन से बाहर निकले। जैसे ही हमने मिंटो ब्रिज की ओर चलना शुरू किया, लोग हमारे साथ जुड़ते गए। सच में ऐसा लग रहा था कि हम किसी बहुत बड़े आंदोलन का हिस्सा हैं।’’
जैसे-जैसे समय बीतता गया, फुटपाथ पर भीड़ बढ़ती गई।
सेठ ने कहा, ‘‘पूरा फुटपाथ प्रदर्शनकारियों से भरा हुआ है। चूंकि बृहस्पतिवार को शाम साढ़े छह बजे के बाद कनॉट प्लेस में दुकानें बंद कर दी गईं, इसलिए ऐसा लग रहा है जैसे कि सड़कों पर हमारे सिवा और कोई नहीं है। आस-पास देखकर मैंने अपने साथ चल रहे लोगों से कहा, ‘यार, सच में ऐसा लग रहा है जैसे मानो हम सत्याग्रह में हैं। ऐसा लग रहा है कि हम दांडी मार्च कर रहे हैं’।’’
फिर एक ऐसा पल आया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी।
सेठ ने कहा, ‘‘जैसे ही हमने ऊपर देखा, मिंटो ब्रिज के नीचे प्रदर्शनकारियों के साथ महात्मा गांधी की वेशभूषा में एक व्यक्ति चलता दिखा। सब लोग हंस पड़े। अचानक सभी ने एक स्वर में जोर से कहा, ‘बापू की जय हो!’ यह उन पलों में से एक है जिन्हें मैं कभी भूल नहीं पाऊंगा।’’
पूरे हफ्ते मेट्रो पर पाबंदियां बढ़ती गईं। सोमवार को कॉजपा के ‘‘संसद चलो’’ मार्च के दौरान मध्य दिल्ली के आस-पास पांच स्टेशन शुरू में बंद किए गए थे। बुधवार तक जंतर-मंतर के आस-पास बंद स्टेशनों की संख्या बढ़कर 17 हो गई। शुक्रवार को भी पाबंदियां जारी रहीं और अब तक 18 मेट्रो स्टेशन बंद किए जा चुके हैं जिससे राष्ट्रीय राजधानी की जीवन रेखा माने जाने वाली दिल्ली मेट्रो से यात्रा करने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मेट्रो स्टेशन बंद होने का असर सिर्फ प्रदर्शन में शामिल होने वालों पर ही नहीं पड़ा, बल्कि इसका असर दफ्तर जाने वालों, खरीदारी करने वालों और अन्य यात्रियों को भी करना पड़ा जिन्हें मार्ग परिवर्तन, भीड़-भाड़ वाले ‘इंटरचेंज’ स्टेशनों और ऑटो-रिक्शा व ऐप आधारित कैब सेवा के लिए अत्यधिक किराया देना पड़ा।
डीएमआरसी ने बृहस्पतिवार देर रात घोषणा की थी कि प्रभावित 17 स्टेशनों में से सिर्फ तीन स्टेशन ही दोबारा खोले गए हैं जबकि बाकी स्टेशन अगली सूचना तक बंद रहेंगे।
इस अद्यतन सूचना की सोशल मीडिया पर कई लोगों ने आलोचना की।
एक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता ने देर रात की इस घोषणा का मजाक उड़ाते हुए लिखा, ‘‘सब लोग घर पहुंच चुके हैं, अब आप उन्हें दोबारा बंद कर सकते हैं।’’
एक अन्य व्यक्ति ने आरोप लगाया कि अधिकारी ‘‘जान-बूझकर आम लोगों की आवाजाही बाधित करके उन्हें परेशान कर रहे हैं ताकि लोगों की भावना प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बने।’’
हालांकि, प्रदर्शनकारियों के बीच यह आम राय देखने को मिली कि मेट्रो बंद होने से भले ही यात्रा मुश्किल हो गई थी, लेकिन इससे प्रदर्शन में लोगों की भागीदारी कम नहीं हुई।
भाषा सुरभि सुभाष
सुभाष