दिल्ली की अदालत ने विवाहिता की मौत के मामले में पति और सास को दोषी करार दिया

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दिल्ली की अदालत ने विवाहिता की मौत के मामले में पति और सास को दोषी करार दिया

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  • Publish Date - June 1, 2026 / 06:00 PM IST,
    Updated On - June 1, 2026 / 06:00 PM IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने दहेज हत्या के एक मामले में आरोपी पति और सास, दोनों को दोषी करार दिया है।

अदालत ने अपने निर्णय में कहा है कि अभियोजन पक्ष ने यह साबित किया है कि विवाहिता मौत से ठीक पहले तक दहेज से संबंधित उत्पीड़न और मांगों का अनवरत सामना कर रही थी।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरविंदर सिंह ने जितेंद्र और उसकी मां रामबती के खिलाफ दहेज हत्या और पति या ससुराल पक्ष द्वारा क्रूरता के आरोपों के तहत मामले की सुनवाई की।

अदालत ने 30 मई को दिये फैसले में कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष यह भी साबित करने में सफल रहा है कि विवाहिता की मृत्यु की तारीख से कुछ दिन पहले, आरोपी पक्ष ने उसे 50,000 रुपये के अतिरिक्त दहेज के लिए यातना/उत्पीड़न/क्रूरता का शिकार बनाया था। आरोपी दहेज की मांग के आगे विवाहिता और उसके परिवार के सदस्यों को झुकाने के लिए (विवाहिता के साथ) मारपीट भी करते थे।’’

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, जितेंद्र से पूजा की शादी 10 जून, 2011 को हुई थी और 21 अगस्त, 2016 को पूर्वी गोकलपुर स्थित अपने ससुराल में उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

महिला के परिजनों ने आरोप लगाया कि दहेज की मांग शादी से पहले ही शुरू हो गई थी। तिलक समारोह के दौरान, जितेंद्र ने कथित तौर पर बजाज डिस्कवर मोटरसाइकिल उपहार में मिलने पर नाराजगी जताई थी और अधिक महंगी मोटरसाइकिल की मांग की, जिसके बाद 10,000 रुपये के भुगतान के बाद विवाद सुलझा।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि जितेंद्र ने बाद में अपाचे मोटरसाइकिल की मांग की और विवाहिता पूजा के पिता ने 50,000 रुपये का भुगतान किया, जबकि सास रामबती ने अपनी बेटी की शादी के लिए एक लाख रुपये मांगे। परिवार ने यह भी दावा किया कि पूजा को लड़की को जन्म देने के कारण प्रताड़ित भी किया गया और अधिक दहेज के लिए उसके साथ मारपीट और क्रूरता की गई।

अदालत ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि पूजा अपनी मृत्यु से कुछ ही दिन पहले रक्षाबंधन के अवसर पर अपने मायके गई थी और उसने परिवार के सदस्यों से अपने पति और ससुराल वालों द्वारा लगातार उत्पीड़न और शारीरिक यातना की शिकायत की थी। उसे 19 अगस्त, 2016 को ससुराल वापस भेज दिया गया और दो दिन बाद उसकी मृत्यु हो गई।

अदालत ने बचाव पक्ष की इस दलील को खारिज कर दिया कि पूजा अपनी बहन की शादी टूटने के कारण अवसादग्रस्त थी। इसने कहा कि इस दावे को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया गया।

अदालत ने जितेंद्र और रामबती को दोषी करार देते हुए कहा कि सबूतों से यह साबित होता है कि पूजा को वैवाहिक जीवन के दौरान दहेज के लिए क्रूरता, मारपीट और उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा था और यह व्यवहार उसकी मृत्यु तक जारी रहा।

भाषा धीरज सुरेश

सुरेश