नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में ई-रिक्शा के संचालन को विनियमित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर दिल्ली सरकार और यातायात पुलिस से जवाब मांगा।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ मनीष पराशर द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने पिछले साल एक दुर्घटना ई-रिक्शा से स्कूल जा रही अपनी आठ वर्षीय बेटी को खो दिया था।
अदालत ने दिल्ली सरकार, उसके परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और दिल्ली नगर निगम को नोटिस जारी किया और अधिकारियों से उनके द्वारा अपनाए गए उपायों को बताने को कहा।
जन सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि तेज रफ्तार से चल रहे ई-रिक्शा के पलट जाने से नाबालिग लड़की की कुचलकर मौत हो गई। ई-रिक्शा का बीमा नहीं था और वह प्रतिबंधित सड़क पर चल रहा था।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को तय करते हुए कहा, “प्रतिवादियों को नोटिस जारी करें। प्रतिवादियों को जवाब में हलफनामा दाखिल करने को कहें ।”
अधिवक्ता गौरव आर्य और नवीन बामेल के माध्यम से दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा कि ई-रिक्शा का अनियंत्रित विस्तार हो रहा है, जो एक “सतत खतरा” बन गया है।
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