दिल्ली में बस दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति के परिजनों को 67.48 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश
दिल्ली में बस दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति के परिजनों को 67.48 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश
नयी दिल्ली, 11 जुलाई (भाषा) दिल्ली के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने दिसंबर 2021 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में बस की चपेट में आने से जान गंवाने वाले 33 वर्षीय मोबाइल फोन तकनीशियन के परिवार को 67.48 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
पीठासीन अधिकारी मनीष शर्मा ने शकील अहमद के परिवार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दुर्घटना में शामिल बस का बीमा करने वाली ‘रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड’ को पीड़ित परिवार को 67,48,200 रुपये की मुआवजा राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का निर्देश दिया।
छह जुलाई के आदेश में कहा गया है, ‘‘यह अधिकरण इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि प्रतिवादी संख्या एक ने घटना के समय संबंधित वाहन को तेज गति और लापरवाही से चलाया, जिसके कारण युवक की जान गई।’’
एमएसीटी के अनुसार, 16 दिसंबर 2021 को सीलमपुर की लाल बत्ती के पास एक बस ने शकील अहमद के स्कूटर को टक्कर मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई। उनके परिवार में पत्नी, तीन बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता हैं, जिन्होंने मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी।
बस के चालक और मालिक ने लापरवाही के आरोप से इनकार करते हुए दावा किया कि मृतक गलत दिशा से बस से आगे निकलने की कोशिश कर रहा था और इसी दौरान वह बस से टकरा गया। हालांकि, अधिकरण ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि प्रतिवादी अपने दावे के समर्थन में कोई साक्ष्य पेश करने में विफल रहे।
एमएसीटी ने माना कि दुर्घटना बस चालक द्वारा तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हुई और बीमा कंपनी को मुआवजा राशि के भुगतान के लिए उत्तरदायी ठहराया।
मुआवजे की गणना करते समय अधिकरण ने उन साक्ष्यों पर गौर किया, जिनसे पता चला कि युवक मोबाइल फोन की मरम्मत करने वाला एक कुशल तकनीशियन था और प्रति माह 30,000 रुपये कमाता था। वह अपने नियोक्ता के व्यावसायिक उद्देश्यों से चीन भी गया था।
अधिकरण ने भविष्य में आय में संभावित वृद्धि को जोड़कर तथा जीवनसाथी और परिवार के साथ से वंचित होने, अंतिम संस्कार के खर्च और संपत्ति की हानि जैसे पारंपरिक मदों के तहत मुआवजा प्रदान करते हुए कुल 67.48 लाख रुपये की राशि निर्धारित की।
बीमा कंपनी को 30 दिनों के भीतर मुआवजे की राशि जमा करने का निर्देश दिया गया है। ऐसा नहीं करने पर उसे देरी की अवधि के लिए 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
भाषा गोला पवनेश
पवनेश

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