देश का भविष्य पुस्तकालयों में जुटने वाले युवाओं की संख्या से आंका जा सकता है : अमित शाह

देश का भविष्य पुस्तकालयों में जुटने वाले युवाओं की संख्या से आंका जा सकता है : अमित शाह

देश का भविष्य पुस्तकालयों में जुटने वाले युवाओं की संख्या से आंका जा सकता है : अमित शाह
Modified Date: July 11, 2026 / 04:08 pm IST
Published Date: July 11, 2026 4:08 pm IST

(फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 11 जुलाई (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) क्षेत्र में लोकनायक जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय का उद्घाटन किया और कहा कि किसी देश के भविष्य का आकलन उसकी आर्थिक प्रगति से अधिक इस बात से किया जा सकता है कि उसके पुस्तकालय कितने आबाद हैं और वहां कितने युवा पढ़ने आते हैं।

शाह ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यदि किसी देश के भविष्य का आकलन करना हो तो यह उसकी कृषि समृद्धि, बाजारों की चहल-पहल या उद्योगों की संख्या देखकर नहीं किया जा सकता। इसका आकलन इस आधार पर किया जा सकता है कि उसके पुस्तकालय कितने भरे रहते हैं और वहां युवा आते हैं या नहीं।’’

उन्होंने कहा कि ज्ञान और विवेक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं तथा पुस्तकालय दोनों के संवर्धन में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।

शाह ने कहा, ‘‘जो गतिविधियां किसी राष्ट्र को आगे बढ़ाती हैं और उसे समृद्ध बनाती हैं, उनकी जड़ें ज्ञान और विवेक में होती हैं। और यह ज्ञान केवल पुस्तकालयों से ही प्राप्त होता है।’’

केंद्रीय गृह मंत्री ने पुस्तकालय प्रशासन से आसपास के क्षेत्रों के स्कूलों से संपर्क स्थापित करने का आग्रह करते हुए कहा कि युवाओं में पढ़ने की आदत को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहां के पुस्तकालय कर्मचारियों से आग्रह करता हूं कि आसपास के 10 विधानसभा क्षेत्रों के सभी स्कूलों से संपर्क करें। युवाओं को एक बार यहां लेकर आइए। इसके बाद किताबें अपना काम स्वयं कर देंगी। जब किसी युवा में पढ़ने की आदत विकसित हो जाती है तो वह स्वयं सही और गलत में अंतर करना सीख जाता है।’’

शाह ने कहा कि पुस्तकालय में लगभग 32,000 पुस्तकों और एक करोड़ ई-पुस्तकों तक पहुंच की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दिल्ली सरकार शहर के सभी पुस्तकालयों को एक-दूसरे से जोड़ेगी और उन्हें स्कूलों के साथ भी संबद्ध करेगी।

उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम पर पुस्तकालय का नाम रखने के लिए एनडीएमसी की सराहना भी की।

शाह ने कहा, ‘‘जयप्रकाश नारायण ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अपने जीवन में अनेक विचारधाराओं को अपनाया, लेकिन जिस भी विचारधारा के साथ उन्होंने काम किया, उसमें उत्कृष्टता हासिल करने का प्रयास किया।’’

स्वतंत्रता संग्राम में जयप्रकाश नारायण की भूमिका का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने अपने प्राणों की परवाह किए बिना हजारीबाग जेल से भागकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन में फिर से हिस्सा लिया।

इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह सार्वजनिक पुस्तकालय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन साबित होगा।

गुप्ता ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि इस पुस्तकालय का उद्घाटन दिल्ली के लोगों के लिए एक बड़ा उपहार है। यह युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर बनेगा। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को यहां पढ़ाई करने का वह वातावरण मिलेगा जिसकी उन्हें आवश्यकता होती है।’’

उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान राजधानी में नागरिक बुनियादी ढांचे में सुधार देखने को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘दिल्ली के लोगों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता था, वे धीरे-धीरे समाप्त हो रही हैं। दिल्ली एक विकसित शहर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस बार जल निकासी की व्यवस्था पहले से कहीं बेहतर है और जलभराव की घटनाएं बहुत कम हुई हैं। इसका बड़ा श्रेय लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा और पूरी सरकार को जाता है, जो मिलकर काम कर रही है।’’

एनडीएमसी के अनुसार, मंदिर मार्ग स्थित इस पुस्तकालय को आधुनिक सार्वजनिक अध्ययन एवं पठन केंद्र के रूप में विकसित किया गया है, जहां एक समय में 200 लोगों के बैठने की व्यवस्था है।

नागरिक निकाय ने बताया कि पुस्तकालय में 30,000 से अधिक पुस्तकें उपलब्ध हैं। इसके अलावा इसमें एक ई-लाइब्रेरी अनुभाग भी है, जिसके माध्यम से सदस्यों को पांच लाख से अधिक ई-पुस्तकों और डिजिटल कैटलॉग तक पहुंच मिलती है।

पुस्तकालय के भूतल पर बहुउद्देशीय सभागार, पहली और दूसरी मंजिल पर पुस्तकालय कक्ष बनाए गए हैं तथा इसमें लिफ्ट की सुविधा भी उपलब्ध है।

अधिकारियों ने बताया कि इस पुस्तकालय का उद्देश्य पाठकों को एक ही स्थान पर मुद्रित और डिजिटल दोनों प्रकार के अध्ययन संसाधन उपलब्ध कराना है।

भाषा रवि कांत नेत्रपाल

नेत्रपाल


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