नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के एक मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 2015 में सड़क हादसे में अशक्त हुए 30-वर्षीय एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को 70.60 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
पीठासीन अधिकारी अरुल वर्मा आवेदक कुणाल सिंह की दावा याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। कुणाल सिंह चार अप्रैल, 2015 को मोटरसाइकिल पर सवार होकर गुरुग्राम स्थित अपने कार्यालय से घर लौट रहे थे तभी एक पिकअप वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
न्यायाधिकरण ने 16 अक्टूबर के आदेश में कहा कि यह स्थापित हो चुका है कि दुर्घटना पिकअप वाहन चालक की लापरवाही एवं तेज गति से वाहन चलाने के कारण हुई।
आदेश में कहा गया, ‘‘कोई भी धनराशि उस पीड़ा की भरपाई नहीं कर सकती जो पीड़ित ने झेली है, लेकिन आशा है कि कुछ मुआवजा मिलने से उसकी पीड़ा को कुछ हद तक कम करने में मदद मिलेगी।’’
न्यायाधिकरण ने कहा, ‘‘उसे उचित और न्यायसंगत तरीके से मुआवज़ा देने के लिए गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए।’’ उसने सिंह को घुटने के नीचे गंभीर चोटें और 45 प्रतिशत स्थायी अशक्तता का हवाला दिया।
न्यायाधिकरण ने कहा कि इस चोट ने पीड़ित के भविष्य को प्रभावित किया है। इसने विभिन्न मदों में कुल 70.60 लाख रुपये से अधिक मुआवजा देने का आदेश दिया।
न्यायाधिकरण ने कहा कि मुआवजे की तय की गई राशि चुकाने की जिम्मेदारी चालक, वाहन मालिक और चोलामंडलम जनरल इंश्योरेंस कंपनी, तीनों की है, लेकिन यह राशि जमा करने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की होगी।
भाषा धीरज सुरेश
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