नयी दिल्ली, 10 नवंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को दिसंबर 2023 के संसद सुरक्षा उल्लंघन मामले में कथित रूप से शामिल तीन व्यक्तियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि संसद की कार्यवाही में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं डाली जा सकती।
न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी के लिए स्थगित कर दी। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, “आप संसद को बाधित नहीं कर सकते… यह संदेश पुरजोर और स्पष्ट रूप से दिया जाना चाहिए।”
पीठ मनोरंजन डी, सागर शर्मा और ललित झा की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
कार्यवाही के दौरान मनोरंजन डी के वकील ने कहा कि दो अन्य सह-आरोपी नीलम आजाद और महेश कुमावत को जमानत दे दी गई है।
वर्ष 2001 में संसद पर हुए आतंकवादी हमले की वर्षगांठ पर 2023 में एक बड़ी सुरक्षा चूक में, आरोपी सागर शर्मा और मनोरंजन डी. कथित तौर पर शून्यकाल के दौरान दर्शक दीर्घा से लोकसभा के सदन में कूद गए, कनस्तरों से पीली गैस छोड़ी और नारे लगाए, जिसके बाद कुछ सांसदों ने उन्हें काबू कर लिया।
लगभग उसी समय, दो अन्य आरोपियों- अमोल शिंदे और नीलम आजाद- ने संसद परिसर के बाहर कथित तौर पर “तानाशाही नहीं चलेगी” के नारे लगाते हुए कनस्तरों से रंगीन गैस का छिड़काव किया।
चार आरोपियों को मौके से हिरासत में ले लिया गया, जबकि झा और कुमावत को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।
भाषा प्रशांत सुरेश
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