अदालत ने गवाहों को नहीं माना भरोसेमंद, दिल्ली दंगा मामले में नौ लोगों को बरी किया

Ads

अदालत ने गवाहों को नहीं माना भरोसेमंद, दिल्ली दंगा मामले में नौ लोगों को बरी किया

  •  
  • Publish Date - April 2, 2026 / 07:10 PM IST,
    Updated On - April 2, 2026 / 07:10 PM IST

नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषाा) दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के दंगों से संबंधित एक मामले में नौ लोगों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि गवाहों की गवाही भरोसेमंद नहीं है, क्योंकि उनमें विशिष्टता की कमी है और वे सामान्य प्रकृति की हैं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े लूट और आगजनी के मामले में गिरफ्तार किए गए नौ लोगों शाह आलम, राशिद सैफी, मोहम्मद शादाब, हबीब, इरफान, सुहैल, सलीम उर्फ ​​आशु, इरशाद और अजहर उर्फ ​​सोनू के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रहे थे।

अदालत ने 30 मार्च के एक आदेश में कहा, ‘‘गवाहियां सामान्य प्रकृति की हैं, उनमें विशिष्टता का अभाव है, विशेष रूप से इस तथ्य को देखते हुए कि इन गवाहों ने घटना स्थल के संबंध में झूठी गवाही दी है…मेरा मानना ​​है कि इन गवाहों की गवाही पर भरोसा करके आरोपियों को दोषी ठहराना ठीक नहीं होगा।’’

राष्ट्रीय राजधानी के चांद बाग इलाके में भड़के दंगों के दौरान एक वाहन में तोड़फोड़, मोटरसाइकिल जलाने, विक्रेताओं के ठेलों को लूटने और ‘रॉयल ​​मोटर्स’ नामक दुकान में आग लगाने के मामले में दयालपुर थाने में दर्ज मामले में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।

प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में विरोधाभास का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि मामले के जांच अधिकारी ने घटना की गलत तारीख 24 फरवरी दर्ज की, जबकि घटना 25 फरवरी, 2020 को हुई थी।

एक समाचार चैनल के वाहन पर हुए हमले के संबंध में, अदालत ने कहा कि चालक और यात्री द्वारा बताए गए स्थान एवं समय पुलिस के घटनास्थल के नक्शे और गवाहों की गवाही के बिल्कुल विपरीत थे।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इस घटना के संबंध में कांस्टेबल ज्ञान सिंह और हेड कांस्टेबल सुनील के बयान पूरी तरह से झूठे पाए गए हैं।’’ उन्होंने यह भी कहा कि घटना वास्तव में उस स्थान से काफी दूर घटी थी जहां पुलिस ने दावा किया था।

अदालत ने कहा कि चूंकि मुख्य गवाहों ने प्रमुख घटनाओं के समय और स्थान के बारे में झूठी गवाही दी, इसलिए अन्य कथित दंगा कृत्यों के लिए आरोपियों को दोषी ठहराने के संबंध में उनकी गवाही पर भरोसा करना असुरक्षित होगा।

भाषा आशीष नरेश

नरेश