नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 2020 के दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में अपना फैसला 11 जून तक के लिए टाल दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 11 आरोपियों के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रहे थे और उन्होंने अपना फैसला 11 जून तक के लिए स्थगित कर दिया।
यह मामला दयालपुर पुलिस थाने में अंकित शर्मा के पिता रवींद्र कुमार की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है।
शिकायत के अनुसार खुफिया ब्यूरो में तैनात शर्मा 25 फरवरी, 2020 को कार्यालय से घर लौटने के बाद फिर से बाहर निकले थे।
इसके अनुसार जब वह काफी समय तक नहीं लौटे, तो उनके परिवार ने उनकी तलाश शुरू की लेकिन स्थानीय लोगों से पता चला कि उनके बेटे की हत्या कर दी गई है और शव चांद बाग पुलिया इलाके में एक मस्जिद के निकट खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया है।
शर्मा का शव बाद में नाले से बरामद किया गया।
अपनी शिकायत में कुमार ने आरोप लगाया कि उनके बेटे की हत्या ‘आप’ के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और अन्य लोगों ने की थी।
इसमें कहा गया है कि वे हुसैन के कार्यालय में कथित तौर पर इकट्ठा हुए थे, और हत्या के बाद अंकित के शव को ठिकाने लगा दिया गया।
दिल्ली की एक अदालत ने 24 मार्च, 2023 को हुसैन और 10 अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय किए थे।
अन्य आरोपियों में हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान, नाजिम, कासिम, समीर खान, अनस, फिरोज, जावेद, गुलफाम, शोएब आलम उर्फ बॉबी और मुंतजिम उर्फ मूसा शामिल हैं। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की उन धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं जो दंगा, घातक हथियारों से लैस होकर दंगा करने, समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना, हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित हैं।
यह मामला नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ा है।
पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं में 53 लोग मारे गये थे और कई अन्य घायल हो गये थे।
भाषा
देवेंद्र पवनेश
पवनेश