परिसीमन का उद्देश्य मतों को विभाजित करना है, महिलाओं को सशक्त बनाना नहीं: खरगे

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परिसीमन का उद्देश्य मतों को विभाजित करना है, महिलाओं को सशक्त बनाना नहीं: खरगे

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  • Publish Date - April 19, 2026 / 09:08 PM IST,
    Updated On - April 19, 2026 / 09:08 PM IST

होसुर (तमिलनाडु), 19 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को कहा कि विपक्ष प्रस्तावित परिसीमन का विरोध कर रहा है क्योंकि इसका उद्देश्य ‘मतों को बांटकर शासन करना’ है।

खरगे ने कहा कि इसे राजनीतिक लाभ के लिए महिलाओं के आरक्षण के उपाय के रूप में गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं है।

कर्नाटक सीमा के पास होसुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए खरगे ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य विपक्षी दलों को कमजोर करने के लिए मनमाने ढंग से निर्वाचन क्षेत्रों में बदलाव करना है।

उन्होंने इसे रोकने के प्रयासों का समर्थन करने के लिए तमिलनाडु की जनता, उसके सांसदों और मुख्यमंत्री एम के स्टालिन को श्रेय दिया।

होसुर में कन्नड़ और तमिल भाषी आबादी की अच्छी खासी संख्या है।

उन्होंने कहा, “यह महिलाओं के लिए आरक्षण विधेयक नहीं है; यह परिसीमन कानून है। उन्होंने विपक्षी दलों के वोट को बांटकर शासन करने की कोशिश की।” उन्होंने कहा कि गठबंधन ने परिसीमन के प्रयास के खिलाफ ऐतिहासिक जीत हासिल की है।

अंग्रेजी और कन्नड़ में बोलते हुए खरगे ने स्टालिन की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक कर्मठ व्यक्ति बताया जो आत्मसम्मान के लिए संघर्ष करते हैं और किसी भी धर्म में अंधविश्वास के बिना नेतृत्व करते हैं।

उन्होंने कहा कि स्टालिन ने पेरियार ई.वी. रामासामी, सी.एन. अन्नादुरई और एम. करुणानिधि जैसे नेताओं की गरिमा, तर्कसंगत विचार और समानता पर आधारित विरासत को आगे बढ़ाया।

कांग्रेस की वैचारिक विरासत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू वैज्ञानिक चिंतन और तर्कशक्ति में विश्वास रखते थे और दलील दी कि द्रविड़ और कांग्रेस दोनों परंपराओं ने अंधविश्वास को नकारते हुए सत्य और न्याय का समर्थन किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए खरगे ने 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन में देरी पर सवाल उठाया।

उन्होंने कहा, ‘यह कानून 2023 में पारित हुआ था। आपने इसे लागू क्यों नहीं किया? वे 30 महीने तक चुप रहे, और आज कह रहे हैं कि कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और अन्य विपक्षी दल महिलाओं के खिलाफ हैं।’’

खरगे ने कहा कि विपक्ष महिला सशक्तिकरण का समर्थन करता है। उन्होंने कहा, ‘हम महिलाओं के समर्थन में हैं, हम लोकतंत्र के समर्थन में हैं, हम न्याय के समर्थन में हैं, और हम जनता के लिए न्याय और समानता के समर्थन में हैं।’

राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे ने महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण के समर्थन को भी दोहराया। प्रधानमंत्री पर ‘विभाजनकारी सामाजिक व्यवस्था’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए खरगे ने कहा, ‘वे चतुर्वर्ण व्यवस्था के समर्थक, शूद्रों के खिलाफ और महिलाओं के खिलाफ हैं।’’

कांग्रेस पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि परिसीमन में ‘मनमाने ढंग से क्षेत्रों का स्थानांतरण, एक क्षेत्र को दूसरे जिले से जोड़ना’ शामिल होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य विपक्ष के वोट बैंक को विभाजित करना है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता खरगे ने केंद्र सरकार पर प्रमुख वादों को पूरा नहीं करने का भी आरोप लगाया और कहा कि नोटबंदी, रोजगार सृजन, किसानों की आय दोगुनी करने और महंगाई नियंत्रण के परिणाम नहीं मिले।

उन्होंने कहा, ‘इन सभी वादों को पूरा करने में विफल रहने वाले का नाम मोदी है – झूठ के बादशाह।’ उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए उनकी देशव्यापी पहुंच का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल चले, जबकि मोदी एक जगह बैठकर पूजा करते हैं। इससे देश का उत्थान नहीं होगा।’

खरगे ने कहा कि स्टालिन और गांधी के नेतृत्व में विपक्ष का अभियान लोकतंत्र की रक्षा के उद्देश्य से चलाया गया था। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार ने कांग्रेस के समर्थन से यह सुनिश्चित किया है कि कल्याणकारी योजनाएं गरीबों तक पहुंचें और वादों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

उन्होंने मतदाताओं से चुनाव में द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन को चुनने का आग्रह किया।

द्रमुक, कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और अन्य गठबंधन सहयोगियों से एकता का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वे ‘एक हाथ की दस उंगलियों की तरह एकजुट हैं और स्टालिन के नेतृत्व में एक साथ लड़ रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘यह मत सोचो कि तुम (स्टालिन) अकेले हो, पूरा देश तुम्हारे साथ खड़ा है।’

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होंगे और परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों को निर्णायक मोड़ बताते हुए खरगे ने कहा कि यह ‘मोदी की 12 वर्षों में पहली हार’ है।

भाषा अमित नरेश

नरेश