नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) कोविड काल के दौरान कुछ स्टेशनों पर बंद किया गया ट्रेनों का ठहराव पुन: शुरू करने की मांग करते हुए मंगलवार को राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी की सदस्य गीता उर्फ चंद्रप्रभा ने कहा कि इन ट्रेनों के ठहराव से स्थानीय लोगों की आजीविका भी चलती थी।
शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए गीता ने कहा कि जनपद इटावा के भरथना और जनपद औरैया के अठैया, दिदिया और कंचौसी के स्टेशनों पर ट्रेनों का ठहराव समाप्त होने के कारण वहां के लोगों की आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने कहा ‘‘स्थानीय लोगों में से कुछ ई-रिक्शा चलाते थे और कुछ स्टेशनों पर फुटकर सामान बेचते थे। इससे उनकी आजीविका चलती थी। अब यह सब थम गया है।’’
गीता ने कहा कि उन्होंने पहले भी यह मुद्दा उठाया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने मांग की कि जनपद इटावा और औरैया के इन स्टेशनों पर ट्रेनों के ठहराव की व्यवस्था उसी तरह बहाल की जाए जैसी कोविड काल के पहले थी ताकि वहां के स्थानीय लोगों की आजीविका निर्बाध तरीके से चल सके।
भाजपा के ही डॉ सिकंदर कुमार ने शून्यकाल में हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर और उना जिलों को जोड़ने वाले 39 किलोमीटर लंबे रंगत लठियानी मार्ग का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस मार्ग को राजमार्ग का दर्जा देना बेहतर होगा ताकि यहां से आवागमन सुगम हो सके और व्यापार को भी बढ़ावा दिया जा सके।
उन्होंने दावा किया कि यह मार्ग राजमार्ग घोषित करने संबंधी मानकों को पूरा करता है। उन्होंने इसके लिए आवश्यक वित्त बजट भी इसी साल आवंटित करने की मांग की।
कुमार ने कहा कि यह मार्ग उना और हमीरपुर के बीच की दूरी को कम कर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देगा और पर्यटकों एवं बाबा बालकनाथ मंदिर के श्रद्धालुओं के लिए सुगम मार्ग तथा स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार मुहैया कराएगा।
इसी पार्टी के महेंद्र भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने चमोली और जोशीमठ की 73 जातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल कर दिया है, लेकिन उन्हें भारत सरकार की केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में अब तक शामिल नहीं किया गया है।
भट्ट ने कहा कि केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल न होने के कारण तेनखंडा समुदाय को केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
भाषा
मनीषा वैभव
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