पंजाब अनुसूचित जाति आयोग ने राज्य मंत्री पर टिप्पणी को लेकर बाजवा को बुधवार को तलब किया

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पंजाब अनुसूचित जाति आयोग ने राज्य मंत्री पर टिप्पणी को लेकर बाजवा को बुधवार को तलब किया

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  • Publish Date - February 10, 2026 / 02:22 PM IST,
    Updated On - February 10, 2026 / 02:22 PM IST

चंडीगढ़, 10 फरवरी (भाषा) पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग (पीएसएससीसी) ने राज्य के मंत्री हरभजन सिंह के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा को 11 फरवरी को तलब किया है।

पीएसएससीसी के अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी ने यहां मंगलवार को मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने लोक निर्माण विभाग के मंत्री हरभजन सिंह को लेकर बाजवा की टिप्पणी का स्वतः संज्ञान लिया है।

उन्होंने कहा कि बाजवा को बुधवार को आयोग के कार्यालय में पेश होकर अपनी टिप्पणी पर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।

बाजवा पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं।

गढ़ी ने बताया कि इस मामले में अमृतसर ग्रामीण के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से भी एक रिपोर्ट मांगी गई है।

उन्होंने कहा कि बाजवा को तलब करने के लिए नोटिस ई-मेल के माध्यम से भेजा गया, क्योंकि यहां सेक्टर-8 स्थित कांग्रेस नेता के आवास पर मौजूद लोगों ने आयोग के एक कर्मचारी के जरिए भेजा गया नोटिस लेने से इनकार कर दिया था।

राज्य में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) बाजवा की टिप्पणी को लेकर उन पर लगातार हमला कर रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने हरभजन सिंह पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा था कि कांग्रेस अपनी सरकार बनने के बाद उन्हें सबक सिखाएगी।

बाजवा ने हरभजन सिंह का जिक्र करते हुए कहा था, “जेहड़ा पहले बैंड वजांदा रह्या, एहदा बैंड असी बजावांगे (जो पहले बैंड बजाता था, हम उसका बैंड बजाएंगे)।”

इस पर पलटवार करते हुए सिंह ने कहा था कि ईमानदारी वाली आजीविकाओं का मजाक उड़ाना शर्मनाक है। उन्होंने कहा था कि उनके पिता एक बैंड मास्टर थे, जिन्होंने कड़ी मेहनत कर अपने बच्चों को पढ़ाया।

सिंह ने कहा, “मैंने सरकारी स्कूल में पढ़ाई की और अपनी काबिलियत के दम पर यहां तक पहुंचा हूं। बाजवा साहब कह रहे हैं कि ‘हम एक बैंड बजाने वाले के बेटे का बैंड बजाएंगे’। हमने कड़ी मेहनत की है। यह अपमान सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि हर उस गरीब परिवार का है जो ईमानदारी की कमाई से अपने बच्चों को पढ़ाता है।”

आम आदमी पार्टी ने सोमवार को यहां बाजवा के खिलाफ प्रदर्शन भी किया।

भाषा मनीषा सिम्मी

सिम्मी