UPI Transaction Par Kitna Charge Lagega: फोन पे, गूगल पे पर किन यूजर्स को देना होगा पैसा? खुद निर्मला सीतारमण ने दी जानकारी, जानिए 2000 रुपए के ट्रांजेक्शन पर कितना भुगतान करना होगा

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UPI Transaction Par Kitna Charge Lagega: फोन पे, गूगल पे पर किन यूजर्स को देना होगा पैसा? खुद निर्मला सीतारमण ने दी जानकारी, जानिए 2000 रुपए के ट्रांजेक्शन पर कितना भुगतान करना होगा

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  • Publish Date - August 7, 2026 / 01:32 PM IST,
    Updated On - August 7, 2026 / 01:44 PM IST

UPI Transaction Par Kitna Charge Lagega: फोन पे, गूगल पे पर किन यूजर्स को देना होगा पैसा? खुद निर्मला सीतारमण ने दी जानकारी, जानिए 2000 रुपए के ट्रांजेक्शन पर कितना भुगतान करना होगा / Image: AI generated

HIGHLIGHTS
  • UPI पर संभावित MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं, बल्कि व्यापारियों पर होगा
  • लोकसभा ने कराधान एवं अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया
  • UPI पर MDR लागू करने का अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है

नई दिल्ली: UPI Transaction Par Kitna Charge Lagega केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को कहा कि डिजिटल लेनदेन पर लगने वाला ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) ग्राहकों पर नहीं, बल्कि व्यापारियों पर लागू होता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह शुल्क बैंकों और वित्तीय-प्रौद्योगिकी कंपनियों को बुनियादी ढांचे और सुरक्षा में निवेश बढ़ाने में मदद करेगा। सीतारमण ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के उस आरोप पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि एकीकृत भुगतान मंच यूपीआई के इस्तेमाल पर आम लोगों को अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।

यूपीआई पर देना होगा चार्ज

UPI Transaction Par Kitna Charge Lagega सीतारमण ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि यूपीआई और एनपीसीआई की अगुवाई वाली सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने अभी एमडीआर पर कोई अंतिम फैसला नहीं किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एमडीआर पर निर्णय तभी लिया जाएगा जब संसद ‘कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026’ को पारित करेगी। इस विधेयक के जरिये सरकार को यह अधिकार मिलेगा कि वह अधिसूचना के माध्यम से तय कर सके कि कौन-से इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम या लेनदेन मुफ्त रहेंगे। सीतारमण ने कहा कि एमडीआर केवल व्यापारियों पर लागू होगा और इससे बैंकों व फिनटेक कंपनियों को अवसंरचना, नवाचार और सुरक्षा में निवेश करने में सहायता मिलेगी, जिसका लाभ अंततः यूपीआई उपयोगकर्ताओं को ही मिलेगा।

संसद में पास हुआ बिल

इससे पहले लोकसभा ने सरकार को बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं को ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (यूपीआई) और अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक तरीकों से होने वाले भुगतान पर शुल्क लगाने की अनुमति प्रदान करने का अधिकार देने संबंधी एक विधेयक बृहस्पतिवार को पारित कर दिया गया। यह सरकार को बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं को ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (यूपीआई) और अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक तरीकों से होने वाले भुगतान पर शुल्क लगाने की अनुमति प्रदान करने का अधिकार देता है।

कराधान से जुड़े एक बड़े कानून का हिस्सा

सदन में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच, चर्चा के बिना पारित किए गए ‘कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026’ का मकसद उस मौजूदा कानूनी प्रावधान को हटाना है, जो बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान तरीकों पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लागू करने से रोकता है। आरटीजीएस और एनईएफटी के जरिए होने वाले रियल-टाइम भुगतान के लिए सेवा शुल्क देना पड़ता है। हालांकि, अब तक यूपीआई लेनदेन को ऐसे शुल्क से छूट प्राप्त है। संदाय और निपटान प्रणाली अधिनियम’ में प्रस्तावित बदलाव कराधान से जुड़े एक बड़े कानून का हिस्सा हैं।

सरकार का मकसद उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के लिए डिजिटल भुगतान सेवाओं पर छोटे शुल्क लगाना है, साथ ही बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं (पीएसपी) तथा भुगतान अवसंरचना कंपनियों के लिए एक टिकाऊ राजस्व मॉडल सुनिश्चित करना है, जो डिजिटल भुगतान व्यवस्था को संचालित करती हैं। विधेयक के मसौदे में कहा गया है कि ‘संदाय और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007’ की धारा 10ए बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर कोई शुल्क लगाने से रोकती है, वहीं आयकर अधिनियम की धारा 269एसयू के तहत 50 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाले बड़े व्यवसायों के लिए ‘रुपे’ डेबिट कार्ड और भीम-यूपीआई क्यूआर कोड सहित कुछ निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भुगतान स्वीकार करना अनिवार्य है।

किसी न किसी को तो पैसा चुकाना ही होगा

वर्तमान में, कोई भी बैंक या भुगतान प्रणाली प्रदाता आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 269एसयू के निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के तरीकों का इस्तेमाल करने के लिए किसी पर भी सीधे या परोक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगा सकता है। इस मुद्दे पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने बुधवार को कहा कि डिजिटल तरीकों से भुगतान पर एमडीआर के बारे में बात करना अभी ‘जल्दबाजी’ होगी। उन्होंने कहा कि भुगतान जैसे सार्वजनिक ढांचों में निवेश ज़रूरी है और उन्होंने यह बात दोहराई कि इसके लिए किसी न किसी को तो पैसा चुकाना ही होगा।

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क्या UPI ट्रांजैक्शन पर अब चार्ज लगेगा?

फिलहाल नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि UPI पर MDR लागू करने का अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

यदि MDR लागू होता है तो इसका भुगतान कौन करेगा?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार MDR ग्राहकों पर नहीं, बल्कि व्यापारियों (Merchants) पर लागू होगा।

सरकार ने कौन-सा विधेयक पारित किया है?

लोकसभा ने 'कराधान एवं अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026' पारित किया है, जिससे सरकार को अधिसूचना के जरिए इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर शुल्क तय करने का अधिकार मिलेगा।

MDR क्या होता है?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारी से बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर वसूलते हैं।

सरकार MDR लागू करने पर विचार क्यों कर रही है?

सरकार का कहना है कि इससे बैंकों, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, सुरक्षा बढ़ाने और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी।