कोलकाता, तीन जुलाई (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को कहा कि लोकतांत्रिक विमर्श केवल आलोचना तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि यह रचनात्मक और व्यावहारिक समाधान पर केंद्रित होना चाहिए।
पश्चिम बंगाल विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में सहमति और असहमति स्वाभाविक हैं लेकिन मतभेदों को हमेशा तर्कसंगत, गरिमापूर्ण और सम्मानजनक बहस के माध्यम से व्यक्त किया जाना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विधायी चर्चा का केंद्र केवल आलोचना नहीं बल्कि समाधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रचनात्मक बहस एक जीवंत लोकतंत्र की पहचान है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘आलोचना विधायी कार्यप्रणाली का एक आवश्यक हिस्सा है लेकिन हर चर्चा में जनता की समस्याओं के व्यावहारिक समाधान भी प्रस्तुत किए जाने चाहिए। सार्थक लोकतांत्रिक विमर्श को आलोचना से आगे बढ़कर रचनात्मक और लागू किए जा सकने वाले समाधानों पर समान रूप से ध्यान देना चाहिए।’’
बिरला ने यह टिप्पणी ऐसे समय की है जब विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण संसद की कार्यवाही में लंबे समय तक व्यवधान देखने को मिला है और पिछले कई सत्रों में बार-बार स्थगन के कारण कई दिनों तक कोई कामकाज नहीं हो सका। संसद का मानसून सत्र भी 20 जुलाई से शुरू होने की संभावना है।
उन्होंने कहा, ‘‘हर चर्चा, कानून और नीति का मार्गदर्शन जनकल्याण से होना चाहिए और उसका उद्देश्य नागरिकों की चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तलाशना होना चाहिए।’’
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपना हस्तक्षेप तथ्यों, शोध और तर्कपूर्ण विचारों के आधार पर करना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक विमर्श की गुणवत्ता समृद्ध हो सके।
उन्होंने कहा कि विधानमंडल ऐसे संस्थान बने रहने चाहिए जहां विचारों में प्रतिस्पर्धा हो, लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों की हमेशा विजय हो।
बिरला ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि जनता की आकांक्षाओं के संरक्षक होते हैं और उन्हें कानून निर्माण, रचनात्मक बहस तथा सुशासन में सक्रिय योगदान देना चाहिए, साथ ही पश्चिम बंगाल की समृद्ध लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित रखना चाहिए।
उनका कहना था कि हर विधायक न केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधि है बल्कि राज्य की व्यापक आकांक्षाओं का भी संरक्षक है और उसकी विधायी जिम्मेदारियां स्थानीय मुद्दों से कहीं अधिक व्यापक हैं।
बिरला ने नवनिर्वाचित सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि जनता ने उन पर अपार विश्वास जताया है और उनसे जवाबदेह, संवेदनशील और दूरदर्शी नेतृत्व की अपेक्षा की है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक विधायक की अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी है लेकिन साथ ही नीति निर्माण और विधायी प्रक्रिया में सार्थक भागीदारी के माध्यम से पूरे राज्य के विकास में योगदान देना भी उनकी जिम्मेदारी है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान पश्चिम बंगाल विधानसभा में बड़ी संख्या में पहली बार निर्वाचित होकर आए सदस्य और युवा विधायक हैं तथा यह राज्य में नए विचारों, नवाचार और जनकेंद्रित शासन को बढ़ावा देने का एक ऐतिहासिक अवसर है।
उन्होंने सार्वजनिक जीवन में युवाओं और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की भी सराहना की।
बिरला ने सदस्यों को सलाह दी कि वे विधानसभा के भीतर अधिक से अधिक समय बिताएं, चाहे उनके बोलने का अवसर निर्धारित हो या नहीं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान विधानसभा द्वारा लिए गए निर्णय केवल वर्तमान पीढ़ी को ही नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रभावित करेंगे।
बिरला ने उम्मीद जताई कि पश्चिम बंगाल एक बार फिर सांस्कृतिक पुनर्जागरण, नवाचार और आर्थिक विकास के अग्रणी केंद्र के रूप में उभरेगा।
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