स्टेडियम में कुत्ते को टहलाने का मामला: आईएएस अधिकारी की बहाली के आदेश पर रोक

स्टेडियम में कुत्ते को टहलाने का मामला: आईएएस अधिकारी की बहाली के आदेश पर रोक

स्टेडियम में कुत्ते को टहलाने का मामला: आईएएस अधिकारी की बहाली के आदेश पर रोक
Modified Date: September 11, 2026 / 01:29 pm IST
Published Date: September 11, 2026 1:29 pm IST

नयी दिल्ली, 11 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कथित तौर पर कुत्ता टहलाने के लिए त्यागराज स्टेडियम खाली करवाने की वजह से चर्चा में आईं भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी रिंकू दुग्गा को बहाल करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी।

दुग्गा को केंद्र सरकार ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा अनिवार्य सेवानिवृत्ति को रद्द किये जाने के खिलाफ केंद्र की ओर से की गई अपील पर दुग्गा को नोटिस जारी किया।

पीठ ने सात सितंबर को अपने आदेश में कहा, ‘‘इस बीच, प्रतिवादी की बहाली पर रोक जारी रहेगी।’’ शीर्ष अदालत ने इसी के साथ मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की।

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र का पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुईं।

दुग्गा ने केंद्र सरकार के फैसले को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में चुनौती दी थी, जिसने उन्हें बहाल करने का आदेश दिया।

उच्च न्यायालय ने भी 15 अप्रैल को कैट के फैसले को बरकरार रखा।

यह विवाद 2022 का है, जब दुग्गा और उनके पति (जो स्वयं भी एक आईएएस अधिकारी हैं) पर आरोप लगा कि उन्होंने अपने कुत्ते को टहलाने के लिए त्यागराज स्टेडियम को खाली करवाया था। इस घटना की तस्वीरें और खबरें सामने आने के बाद काफी आक्रोश फैल गया था।

उच्च न्यायालय ने दुग्गा के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि इस घटना के कारण अनुशासनात्मक कार्यवाही में उन्हें मामूली सजा दी गई थी। अदालत ने बिना अनुमति अनुपस्थित रहने के आरोप का भी संज्ञान लिया। उन्हें अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त करने के आदेश में इन दोनों घटनाओं का हवाला दिया गया था।

उच्च न्यायालय ने यह भी पाया था कि समीक्षा समिति द्वारा उन्हें अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त करने की सिफारिश को सही नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि समिति ने उनके सेवा रिकॉर्ड से जुड़ी कई जरूरी बातों पर गौर नहीं किया। इनमें उनकी सालाना प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) में कोई भी नकारात्मक टिप्पणी न होना, पिछले सालों में उनकी बेहतरीन ग्रेडिंग और यह तथ्य शामिल था कि उन्हें पदोन्नत करने पर विचार किया जा रहा था।

उच्च न्यायालय ने फैसले में यह भी कहा कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का उद्देश्य उन अधिकारियों को सेवा से हटाना है जिन्हें अयोग्य या अनुपयोगी माना जाता है। अदालत ने कहा कि यह सिद्धांत दुग्गा के मामले में लागू नहीं होता है।

भाषा धीरज वैभव

वैभव


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