पूर्वोत्तर में मादक पदार्थों की तस्करी का तरीका बदला, ‘‘एन्क्रिप्टेड’’ ऐप का उपयोग बढ़ा : सरकार

पूर्वोत्तर में मादक पदार्थों की तस्करी का तरीका बदला, ‘‘एन्क्रिप्टेड’’ ऐप का उपयोग बढ़ा : सरकार

पूर्वोत्तर में मादक पदार्थों की तस्करी का तरीका बदला, ‘‘एन्क्रिप्टेड’’ ऐप का उपयोग बढ़ा : सरकार
Modified Date: July 29, 2026 / 06:56 pm IST
Published Date: July 29, 2026 6:56 pm IST

नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) सरकार ने बुधवार को कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी का तरीका ‘‘काफी बदल गया है’’ तथा तस्करों के गिरोह अब ‘‘सिंथेटिक ड्रग’’ का रुख कर रहे हैं ।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा को एक लिखित जवाब में यह भी बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में सीमा पार तस्करी के समन्वय के लिए सोशल मीडिया तथा ‘‘एन्क्रिप्टेड’’ संचार ऐप के इस्तेमाल में तेजी आई है।

राय ने बताया कि क्षेत्र में हेरोइन की तस्करी अब भी जारी है, लेकिन म्यांमा से विशेष रूप से मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड के रास्ते मेथमफेटामाइन (क्रिस्टल मेथ/याबा) की तस्करी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह ‘‘सिंथेटिक ड्रग’’ की ओर बढ़ते रुझान को दर्शाता है।

राय ने कहा, ‘‘पूर्वोत्तर क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी का स्वरूप तस्करी किए जाने वाले पदार्थों, मार्गों और गिरोहों द्वारा अपनाए जा रहे तरीकों के लिहाज से काफी बदल गया है।’’

मंत्री ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों से म्यांमा तक सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की तस्करी की भी खबरें मिली हैं।

सरकार के अनुसार, तस्कर भारत-म्यांमा सीमा के खुले और बिना बाड़ वाले हिस्सों, जंगलों के रास्तों, पगडंडियों और पहाड़ी इलाकों का इस्तेमाल सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी के लिए कर रहे हैं।

राय ने कहा, ‘‘मादक पदार्थों को वैध माल, यात्री वाहनों और मालवाहक वाहनों में छिपाकर ले जाया जाता है। कूरियर सेवाओं, पार्सल नेटवर्क, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड संचार ऐप का इस्तेमाल समन्वय और डिलीवरी के लिए तेजी से किया जा रहा है।’’

उन्होंने कहा कि म्यांमा से हेरोइन और मेथमफेटामाइन की तस्करी के लिए मोरेह-तामू सीमा मार्ग देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचने का एक प्रमुख रास्ता बना हुआ है।

गृह राज्य मंत्री ने कहा कि सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, खासकर पूर्वोत्तर राज्यों में। उन्होंने कहा कि ये राज्य म्यांमा के साथ लगती संवेदनशील और खुली सीमाओं तथा तथाकथित ‘‘डेथ ट्रायंगल’’ के निकट होने के कारण एम्फेटामाइन आधारित उत्तेजक पदार्थों (एटीएस) और हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय तस्करी के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।

राय ने बताया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने वर्ष 2021 से 2025 के दौरान 4,626 किलोग्राम एटीएस और 2,652 किलोग्राम हेरोइन जब्त की है।

उन्होंने कहा कि मुक्त आवागमन व्यवस्था (फ्री मूवमेंट रिजीम) के तहत आने वाले संवेदनशील सीमा क्षेत्रों ने भी तस्करी गतिविधियों को बढ़ावा दिया है। तस्करी गिरोह लगातार अपने रास्ते और तरीके बदलते रहते हैं ताकि जांच एजेंसियों की कार्रवाई से बच सकें।

मंत्री ने बताया कि मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें मादक पदार्थ नियंत्रण पर विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 जारी करना, चार स्तरीय नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनसीओआरडी) व्यवस्था को मजबूत करना और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) की मौजूदगी बढ़ाना शामिल है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने पूर्वोत्तर में नए क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने, उन्नत निगरानी प्रणालियां लगाने, एंटी-ड्रोन तकनीक तैनात करने और संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में बेहतर बाड़ लगाने जैसे उपाय भी किए हैं।

भाषा मनीषा अविनाश

अविनाश


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