भाजपा में शामिल हो जाओ वरना माता-बाप मुसीबत में पड़ जाएंगे: दीपके की मां ने ‘धमकी’ का जिक्र किया

भाजपा में शामिल हो जाओ वरना माता-बाप मुसीबत में पड़ जाएंगे: दीपके की मां ने ‘धमकी’ का जिक्र किया

भाजपा में शामिल हो जाओ वरना माता-बाप मुसीबत में पड़ जाएंगे: दीपके की मां ने ‘धमकी’ का जिक्र किया
Modified Date: July 29, 2026 / 08:35 pm IST
Published Date: July 29, 2026 8:35 pm IST

छत्रपति संभाजीनगर, 29 जुलाई (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके की मां अनीता दीपके ने बुधवार को दावा किया कि जब उनके बेटे ने जैसे ही व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन शुरू किया, उसे एक वीडियो के जरिए धमकी दी गई। अनीता ने कहा कि इस वीडियो में उसके बेटे को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के लिए कहा गया और ऐसा न करने पर माता-पिता को मुसीबत में डालने की चेतावनी दी गई।

उन्होंने बताया कि इस धमकी के कारण उसके माता-पिता को छत्रपति संभाजीनगर छोड़ना पड़ा और कोंकण इलाके में अपने एक रिश्तेदार के घर दो हफ्ते तक रहना पड़ा।

अभिजीत की मां और पिता भगवान दीपके ने छत्रपति संभाजीनगर में एक मराठी न्यूज़ चैनल से बात की। यह बातचीत उनके बेटे के घर लौटने से पहले हुई, जिन्होंने नयी दिल्ली में अलग-अलग परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर 36 दिनों तक आंदोलन का नेतृत्व किया था। इस आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।

उनकी मां ने दावा किया, ‘‘अभिजीत को धमकियां मिली थीं, लेकिन उसने हमें नहीं बताया। उसने मुझे एक वीडियो के बारे में बताया और सलाह दी कि मैं उसे न देखूं। वीडियो में उसे धमकी दी गई थी कि अगर वह भाजपा में शामिल नहीं हुआ, तो उसके माता-पिता के साथ सख्ती से निपटा जाएगा।’’

उन्होंने बताया कि बाद में अभिजीत ने माता-पिता से कुछ दिनों तक घर से दूर रहने को कहा।

उनकी मां ने कहा, ‘‘अभिजीत ने मुझसे कहा कि वह ऐसी धमकियों से डरता नहीं है, लेकिन उसने हमसे कहा कि चूंकि हमें ऐसी धमकियों की आदत नहीं है, इसलिए हमें घर से दूर रहना चाहिए। इसके बाद हमने घर से बाहर जाने का फैसला किया और कोंकण में एक रिश्तेदार के घर चले गए, जहां हम 16 दिनों तक रहे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उसे चिंता थी क्योंकि उस समय वह हमारे साथ नहीं था और उसके पिता को निम्न रक्तदाब की समस्या है।’’

उनके पिता ने कहा कि समाज सेवा करते समय आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है।

भाषा संतोष नरेश

नरेश


लेखक के बारे में