मजदूर, किसान 10 अगस्त को ‘कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों’ के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे
मजदूर, किसान 10 अगस्त को ‘कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों’ के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे
नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) केंद्रीय श्रमिक संघों और संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बुधवार को केंद्र की श्रम, कृषि और आर्थिक नीतियों के खिलाफ 10 अगस्त को एक नया देशव्यापी आंदोलन शुरू करने का फैसला किया तथा चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
यह फैसला ‘मजदूरों और किसानों के दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन’ में लिया गया, जिसमें 10 केंद्रीय श्रमिक संघों, अलग-अलग क्षेत्रों की फेडरेशन और एसकेएम के सदस्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन में एक संयुक्त प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें केंद्र पर आरोप लगाया गया कि वह मजदूरों, किसानों, छात्रों और युवाओं के हितों को नजरअंदाज करके ‘‘कॉर्पोरेट-समर्थक’’ नीतियां अपना रहा है।
प्रस्ताव में चार श्रम संहिताओं को रद्द करने, विकसित भारत -जी राम जी- अधिनियम को खत्म करके मनरेगा को बहाल करने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, बिजली संशोधन विधेयक को वापस लेने, सार्वजनिक उपक्रमों और सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण को रोकने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, खाली सरकारी पदों को भरने और मजदूरों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा की मांग की गई।
प्रस्ताव में अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ भारत की जारी व्यापार वार्ताओं का भी विरोध किया गया, और आरोप लगाया कि इनसे कृषि, एमएसएमई और घरेलू उद्योगों पर बुरा असर पड़ेगा।
इसने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगांठ पर 10 अगस्त को देशव्यापी विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की।
सभा को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेता राकेश टिकैत ने बड़े पैमाने पर संघर्ष को तेज करने और मजदूरों, किसानों व अन्य लोकतांत्रिक संगठनों के बीच अधिक एकजुटता का आह्वान किया।
टिकैत ने कहा, ‘‘हमें संघर्ष को तेज करना होगा। हमें जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर बंटवारे को कम करना होगा। एकजुट आंदोलनों को मजबूत करके ही इस सरकार को चुनौती दी जा सकती है।’’
‘ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन’ (एआईसीसीटीयू) के नेता राजीव डिमरी ने कहा कि हालिया छात्र आंदोलन ने एकजुट जन-आंदोलनों की ताकत को दिखाया है।
उन्होंने कहा, ‘‘छात्रों और युवाओं के ऐतिहासिक आंदोलन ने शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया। हमें नरेन्द्र मोदी सरकार की नीतियों को हराने के लिए संघर्ष को और मजबूत करना होगा।’’
भाषा शफीक नेत्रपाल
नेत्रपाल

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