नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने इस महीने पांच विधानसभाओं के चुनाव के मतदान से पहले मंगलवार को उस निर्देश का फिर उल्लेख किया, जो एक निर्वाचन अधिकारी को उस मतदान केंद्र पर पुनर्मतदान की सिफारिश करने की अनुमति देता है, जहां ‘वेबकास्टिंग’ जानबूझकर बाधित की जाती है।
आयोग के अधिकारी राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा मतदान केंद्रों पर व्यवधान की आशंका और ऐसे मामलों से निपटने के तरीकों पर एक सवाल का जवाब दे रहे थे।
असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान होगा। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होगा। पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को पहले चरण और 29 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान होना है।
अधिकारियों ने कहा कि यदि कोई निर्वाचन अधिकारी किसी मतदान केंद्र पर वेबकास्टिंग बंद होने के गलत इरादे को लेकर आश्वस्त है, तो वह पुनर्मतदान की सिफारिश करते समय आयोग को परिस्थितियों के बारे में बता सकता है।
वेबकास्टिंग चुनाव आयोग की एक आंतरिक व्यवस्था है जिसका उद्देश्य मतदान केंद्रों पर मतदान प्रक्रिया पर नज़र रखना है।
राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं की ओर से वेबकास्टिंग डेटा साझा करने की मांग की जाती रही है, लेकिन आयोग ने इसे रोकने के लिए नियमों में बदलाव किया है। उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय द्वारा आदेश दिए जाने पर आयोग वेबकास्टिंग डेटा साझा कर सकता है।
चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के उद्देश्य से निर्वाचन आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में सभी मतदान केंद्रों के अंदर और बाहर वेबकास्टिंग के निर्देश जारी किए हैं।
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